बांग्लादेश में ‘रहमान युग’ की शुरुआत: BNP को प्रचंड बहुमत, कल लेंगे शपथ

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tariq rehman

ढाका/नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए 13वें आम चुनाव के नतीजों ने सत्ता की पूरी तस्वीर बदल दी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस चुनाव में आवामी लीग और कट्टरपंथी संगठनों का लगभग सफाया हो गया है, जिसे दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी

चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम रुझानों और नतीजों के अनुसार, बीएनपी ने संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। तारिक रहमान, जिन्होंने दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था, दोनों ही सीटों पर भारी अंतर से विजयी रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह 14 फरवरी 2026 को बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।

भारत के लिए सुखद संकेत: कट्टरपंथियों की हार

इस चुनाव को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जमात का सफाया: पाकिस्तान समर्थक संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ को इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है।

  • भारत विरोधी चेहरों की विदाई: अपनी भारत विरोधी बयानबाजी के लिए चर्चित मौलाना मामूनुल हक चुनाव हार गए हैं।

  • पीएम मोदी की बधाई: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर इस शानदार जीत की बधाई दी है, जिसे दोनों देशों के बीच नए और मजबूत रिश्तों की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

संसद में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

इस बार बांग्लादेशी संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी चर्चा का विषय रहा। कुल 7 महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जिनमें से 6 बीएनपी की टिकट पर चुनी गई हैं:

  • अफरोज़ा खान रीता (मानिकगंज-3)

  • इसरत सुल्ताना एलेन भुट्टो (झालोकाठी-2)

  • तहसीना रुशदीर लूना (सिलहट-2)

  • शामा ओबैद (फरीदपुर-2)

  • नायब यूसुफ कमाल (फरीदपुर-3)

  • फरज़ाना शारमिन पुतुल (नाटोर-1)

  • बैरिस्टर रूमिन फरहाना (ब्राह्मणबाड़िया-2, निर्दलीय)

शेख हसीना युग का अंत?

लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहीं शेख हसीना की आवामी लीग के लिए यह चुनाव किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा। विश्लेषकों का मानना है कि जनता ने बदलाव और लोकतंत्र की बहाली के लिए बीएनपी पर भरोसा जताया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश की विदेश नीति और आर्थिक सुधारों की दिशा क्या होगी।

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