अब बार-बार टैक्स का झंझट खत्म, बाजार मूल्य पर लगेगा ‘वन टाइम टैक्स’
उत्तर प्रदेश | उत्तर प्रदेश में कमर्शियल वाहन स्वामियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) अधिनियम 2025 के लागू होने के बाद अब व्यवसायिक वाहनों के लिए नई कर प्रणाली प्रभावी हो गई है।
क्या है नई ‘OTT’ व्यवस्था?
परिवहन विभाग ने पुराने जटिल सिस्टम को खत्म कर दिया है। पहले टैक्स प्रति सीट, श्रेणी और एसी/नॉन-एसी के आधार पर तय होता था। अब इसे पूरी तरह वाहन के बाजार मूल्य (Market Value) पर आधारित कर दिया गया है।
मुख्य टैक्स स्लैब:
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10 लाख रुपये से कम मूल्य वाले वाहन: वाहन की कीमत का 10.5% टैक्स।
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10 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले वाहन: वाहन की कीमत का 12.5% टैक्स।
किन वाहनों को मिलेगा लाभ?
यह योजना 7500 किलोग्राम तक के यात्री और मालवाहक वाहनों के लिए अनिवार्य की गई है। इसमें शामिल प्रमुख वाहन हैं:
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टैक्सी, ऑटो और मोटर कैब।
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पिकअप, छोटा हाथी और तिपहिया ऑटो।
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ओला बाइक और अन्य कमर्शियल दोपहिया।
विशेष छूट: पुराने वाहनों के लिए एक खास प्रावधान जोड़ा गया है। जैसे-जैसे वाहन पुराना होगा, टैक्स में राहत मिलेगी। हर साल वाहन के पुराने होने पर 8% की वार्षिक छूट दी जाएगी।
उदाहरण: पुराने बनाम नए सिस्टम का गणित (इनोवा)
अगर हम 7-सीटर इनोवा (कमर्शियल) की बात करें:
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पुराना सिस्टम: 3 महीने का टैक्स ₹6973 और सालाना ₹27,720 होता था। 10 साल में यह राशि लगभग ₹2.77 लाख तक पहुँच जाती थी।
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नया सिस्टम (OTT): यदि इनोवा की कीमत ₹20 लाख है, तो 12.5% की दर से आपको केवल ₹2.50 लाख एकमुश्त जमा करने होंगे। इससे न सिर्फ पैसे की बचत होगी, बल्कि बार-बार आरटीओ ऑफिस के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी।
वाहन स्वामियों के लिए फायदे ही फायदे
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पेनल्टी से मुक्ति: एक बार टैक्स भरने के बाद बार-बार भुगतान की समय सीमा और पेनल्टी का डर खत्म।
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डिजिटल सुविधा: वाहन स्वामी अपना टैक्स स्टेटस ‘परिवहन सेवा’ (Parivahan Sewa) पोर्टल पर ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।
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मार्केटप्लेस: टाटा मोटर्स जैसे निर्माता भी ‘Fleet Verse’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए वाहन खरीदने और फाइनेंस के साथ टैक्स की प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं।
