महाशिवरात्रि 2026: शनि दोष से मुक्ति के लिए अपनाएं ये गुप्त उपाय

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Mahashivratri 13.2.26

अध्यात्म भगवान शिव के भक्तों के लिए साल का सबसे बड़ा दिन महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी पावन तिथि पर महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस साल महाशिवरात्रि पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने में सहायक होंगे।

तारीख और शुभ मुहूर्त

  • तारीख: 15 फरवरी, 2026

  • दिन: रविवार

  • महत्व: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन निशिता काल की पूजा का विशेष महत्व है।

शनि दोष से मुक्ति के अचूक उपाय

भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना जाता है। यदि आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैया या कोई अन्य दोष है, तो महाशिवरात्रि पर ये उपाय आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं:

  1. काले तिल का अभिषेक: शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और उसमें थोड़े काले तिल मिला लें। इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

  2. शमी पत्र अर्पण: शनि देव को शमी का वृक्ष प्रिय है। महाशिवरात्रि पर महादेव को शमी के पत्ते चढ़ाने से आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से राहत मिलती है।

  3. बेलपत्र पर महादेव का नाम: 108 बेलपत्र लें और उन पर चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखें। इन्हें एक-एक करके शिवलिंग पर अर्पित करें। यह उपाय शनि की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।

घर में आएगी सुख-समृद्धि: अपनाएं ये तरीके

वेबसाइट पाठकों के लिए यहाँ कुछ सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय दिए गए हैं:

  • रुद्राभिषेक: यदि आप कर्ज से परेशान हैं या धन लाभ चाहते हैं, तो महाशिवरात्रि के दिन शहद से महादेव का अभिषेक करें।

  • अखंड ज्योति का महत्व: महाशिवरात्रि की रात को ‘शिव की रात्रि’ कहा जाता है। इस रात घर या मंदिर में अखंड दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।

  • नंदी की सेवा: महादेव के साथ उनके प्रिय वाहन नंदी की पूजा करना न भूलें। उन्हें हरा चारा खिलाने से आपके रुके हुए कार्यों में गति आती है।

महाशिवरात्रि पूजा के लाभ

“महाशिवरात्रि केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह स्वयं को शिव तत्व से जोड़ने का दिन है। इस दिन ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप आरोग्य और लंबी आयु प्रदान करता है।”

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

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