सत्य निकेतन हादसा: इमारत क्यों ढही? इंजीनियर ने बताए 5 बड़े कारण

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saty niketan

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत के अचानक भरभराकर गिरने की घटना ने देशभर में भवन निर्माण की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक बहुमंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह कैसे ढह गई?

इस हादसे के बाद सिविल इंजीनियर दीपक कुमार ने भवनों के ढहने के पीछे पांच संभावित तकनीकी कारण बताए हैं। इनमें कमजोर नींव, बेसमेंट या ग्राउंड फ्लोर में बिना तकनीकी सलाह के बदलाव, लोड-बेयरिंग दीवारों से छेड़छाड़, क्षमता से अधिक भार और बारिश के कारण सीपेज एवं जलभराव प्रमुख हैं। हालांकि किसी विशेष हादसे की अंतिम वजह जांच रिपोर्ट से ही तय होती है।

1. कमजोर नींव सबसे बड़ा खतरा

बहुमंजिला इमारत की मजबूती उसकी नींव से तय होती है। अगर शुरुआत में ही नींव की गहराई, कॉलम का आकार और स्ट्रक्चर की क्षमता भविष्य में बनने वाली मंजिलों के हिसाब से तय नहीं की गई, तो ऊपर का भार बढ़ने के साथ खतरा भी बढ़ जाता है।

इंजीनियर की सलाह के मुताबिक, यदि किसी भवन को भविष्य में चार या पांच मंजिल तक ले जाने की योजना है तो नींव और कॉलम की डिजाइन उसी हिसाब से तैयार होनी चाहिए। बाद में बिना तकनीकी जांच के मंजिलें बढ़ाना बेहद खतरनाक हो सकता है।

2. बेसमेंट में मनमाना निर्माण पड़ सकता है भारी

बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर में बिना विशेषज्ञ की निगरानी के तोड़फोड़ या निर्माण करना पूरे भवन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

सत्य निकेतन हादसे में भी बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य और पानी जमा होने को लेकर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं।

3. लोड-बेयरिंग दीवार हटाना यानी खतरे को न्योता

कई इमारतों में दीवारें भी स्ट्रक्चर का भार संभालती हैं। ऐसे में रिनोवेशन के नाम पर किसी महत्वपूर्ण दीवार को हटाना या उसमें बड़ा बदलाव करना खतरनाक साबित हो सकता है।

बिना स्ट्रक्चरल इंजीनियर की जांच के कॉलम, बीम या लोड-बेयरिंग दीवार से छेड़छाड़ करने पर भवन का भार-वितरण बिगड़ सकता है।

4. पुरानी इमारत पर बढ़ता बोझ

समय के साथ इमारत की संरचनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद यदि पुरानी इमारत में अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी जाएं या उसकी क्षमता से अधिक लोगों को रखा जाए, तो स्ट्रक्चर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

सत्य निकेतन की घटना ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है कि क्या भवन की मूल डिजाइन और स्वीकृत क्षमता के अनुरूप ही उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में इमारत की मंजिलों और निर्माण नियमों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।

5. बारिश और जलभराव भी बन सकता है वजह

मानसून के दौरान लगातार बारिश और जलभराव इमारतों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। नींव के आसपास पानी जमा होने से मिट्टी की मजबूती प्रभावित हो सकती है। सीपेज लंबे समय तक जारी रहे तो नींव और आसपास की संरचना पर इसका असर पड़ सकता है।

इसीलिए भवन की नींव के आसपास उचित ड्रेनेज और वाटरप्रूफिंग बेहद जरूरी है।

इंजीनियर की 5 जरूरी सलाह

विशेषज्ञ के मुताबिक घर या बहुमंजिला भवन बनाते समय कुछ सावधानियां अनिवार्य हैं—

  • निर्माण शुरू करने से पहले सिविल या स्ट्रक्चरल इंजीनियर से डिजाइन और लोड कैलकुलेशन कराएं।
  • भविष्य में अतिरिक्त मंजिल की योजना हो तो नींव और कॉलम उसी क्षमता के अनुसार डिजाइन कराएं।
  • रिनोवेशन के दौरान कॉलम, बीम और लोड-बेयरिंग दीवार से बिना तकनीकी सलाह के छेड़छाड़ न करें।
  • भवन की निर्धारित भार क्षमता से अधिक निर्माण या उपयोग न करें।
  • नींव के पास जलभराव और सीपेज की समस्या को तत्काल दूर कराएं।

सत्य निकेतन हादसा बना बड़ी चेतावनी

सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई तेज हुई है। MCD अधिकारियों के निलंबन से लेकर अन्य पीजी इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट तक के कदम उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की निगरानी जारी रखने का रास्ता साफ किया है।

सबक साफ है—इमारत की खूबसूरती से ज्यादा जरूरी उसकी नींव और संरचनात्मक सुरक्षा है। निर्माण में बचाई गई थोड़ी रकम या बिना इंजीनियर की सलाह के किया गया छोटा बदलाव भविष्य में बड़ी कीमत वसूल सकता है। सत्य निकेतन का हादसा इसी खतरे की भयावह तस्वीर है।

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