BRICS: पुतिन पहुंचे, शी जिनपिंग समेत 25 देशों के नेताओं पर दुनिया की नजर
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली एक बार फिर दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें दुनिया की उभरती शक्तियों के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार 11 सितंबर को दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शनिवार को पहुंचने की तैयारी है।
इस सम्मेलन पर भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि BRICS के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग जैसे नेताओं की मौजूदगी ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हैं।
पुतिन का दिल्ली आगमन, मोदी से अहम मुलाकात
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच गए। उनके दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, निवेश और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब रूस लगातार पश्चिमी दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत-रूस संबंधों और BRICS के भविष्य को लेकर इस मुलाकात को खास महत्व दिया जा रहा है।
सात साल बाद मोदी-शी की मुलाकात पर नजर
सम्मेलन का सबसे बड़ा कूटनीतिक आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात है। शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे। यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद उनका भारत का पहला दौरा होगा।
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में तनाव के बाद संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। ऐसे में मोदी-शी मुलाकात में सीमा विवाद, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की उम्मीद है।
ईरान के राष्ट्रपति भी दिल्ली में
BRICS सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच उनका भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ईरान और क्षेत्रीय परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं। पेजेशकियन प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।
BRICS में 11 सदस्य देश
BRICS अब पहले के मुकाबले काफी बड़ा हो चुका है। संगठन में वर्तमान में 11 सदस्य देश शामिल हैं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और सऊदी अरब।
इन देशों की सामूहिक ताकत वैश्विक अर्थव्यवस्था और जनसंख्या में बेहद महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में दिल्ली सम्मेलन को केवल आर्थिक बैठक नहीं बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में उभरती शक्तियों के प्रभाव के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
युद्ध से लेकर डॉलर तक, कई मुद्दों पर मंथन
इस बार BRICS सम्मेलन ऐसे अंतरराष्ट्रीय माहौल में हो रहा है जब दुनिया कई बड़े संकटों से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में युद्ध, यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक व्यापार में तनाव और डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशें सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकती हैं।
BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग, डिजिटल भुगतान, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक दक्षिण की भूमिका बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सम्मेलन में BRICS Startup Innovation Fund और सप्लाई-चेन सहयोग जैसे प्रस्तावों पर भी काम आगे बढ़ाने की तैयारी है।
दिल्ली में अभेद्य सुरक्षा घेरा
दुनिया के कई बड़े नेताओं के एक साथ दिल्ली पहुंचने के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। खासतौर पर चाणक्यपुरी और राजनयिक क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। विदेशी नेताओं के लिए अलग-अलग होटल और विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
दुनिया की नजर दिल्ली पर
BRICS सम्मेलन भारत के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाने का बड़ा अवसर है। एक तरफ मोदी-पुतिन की बातचीत और दूसरी तरफ मोदी-शी मुलाकात की संभावनाएं हैं, वहीं ईरान समेत अन्य देशों के नेताओं की मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।
12-13 सितंबर को दिल्ली से निकलने वाले संदेश पर केवल BRICS देशों की नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और पूरी वैश्विक राजनीति की नजर रहेगी।
