80s रेट्रो AI फोटो ट्रेंड से रहें सावधान, साइबर क्राइम ब्यूरो ने दी चेतावनी
शिमला। सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक के रेट्रो लुक में तस्वीरें बदलने का AI ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को पुराने जमाने के कपड़े, हेयर स्टाइल और विंटेज इफेक्ट के साथ शेयर कर रहे हैं। इसी बीच हिमाचल प्रदेश स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो ने लोगों को अनजान AI ऐप या वेबसाइट पर अपनी साफ चेहरे वाली तस्वीरें अपलोड करने से सावधान किया है।
एक फोटो बन सकती है डिजिटल पहचान का जरिया
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, चेहरे की स्पष्ट तस्वीर अब केवल एक फोटो नहीं रह गई है। इसका इस्तेमाल AI की मदद से डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल और भ्रामक वीडियो तैयार करने में किया जा सकता है। किसी व्यक्ति की तस्वीर को दूसरे चेहरे या संदर्भ के साथ जोड़कर ऐसा फर्जी कंटेंट बनाया जा सकता है, जिसे देखकर वास्तविक और नकली में अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
फर्जी प्रोफाइल बनाकर हो सकती है ठगी
साइबर अपराधी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म या AI ऐप पर उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने में कर सकते हैं। इसके बाद व्यक्ति के परिचितों को बीमारी या किसी आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे भेजने के लिए कहा जा सकता है। फर्जी अकाउंट से आपत्तिजनक सामग्री शेयर कर किसी की छवि खराब करने, ब्लैकमेल या ठगी की कोशिश भी की जा सकती है।
फोटो से बन सकता है आपत्तिजनक AI कंटेंट
साइबर ब्यूरो के मुताबिक, सामान्य तस्वीरों में भी AI के जरिए बदलाव कर उन्हें अश्लील या आपत्तिजनक संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने का खतरा है। यही वजह है कि बच्चों, महिलाओं और परिवार के सदस्यों की निजी तस्वीरें सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर डालते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
AI ऐप डाउनलोड करने से पहले जांच जरूरी
साइबर सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी AI फोटो ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर, यूजर रिव्यू और मांगी जा रही परमिशन की जांच करें। जरूरत से ज्यादा अनुमति मांगने वाले ऐप से बचना चाहिए और इस्तेमाल के बाद गैरजरूरी परमिशन बंद कर देनी चाहिए। निजी या संवेदनशील तस्वीरों को अनजान AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से बचना बेहतर है।
ठगी हो तो तुरंत 1930 पर शिकायत
अगर किसी फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल, ब्लैकमेल या साइबर ठगी की जाती है तो चैट, स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल लिंक, मोबाइल नंबर, बैंक लेनदेन और फोटो-वीडियो जैसे डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें और उन्हें डिलीट न करें। आर्थिक साइबर ठगी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल शिकायत करने की सलाह दी गई है।
हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने भी लोगों से AI तकनीक का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की अपील की है। उनका संदेश है कि किसी वायरल ट्रेंड के पीछे भागने से पहले यह समझना जरूरी है कि अपनी निजी तस्वीर किस प्लेटफॉर्म को सौंपी जा रही है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो सकता है।
साफ संदेश: AI का इस्तेमाल गलत नहीं है, लेकिन “सोचें, समझें, फिर अपलोड करें”—यह सावधानी आपकी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने में अहम हो सकती है।
