गांधीनगर स्लैब हादसा: दो दिन बाद भी सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
गांधीनगर। गुजरात की राजधानी गांधीनगर के कुडासन इलाके में 9 सितंबर की रात निर्माणाधीन व्यावसायिक इमारत का स्लैब भरभराकर गिरने की घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। हादसा रात करीब 9 बजे ‘बोस्की द एम्पायर’ साइट पर हुआ, जहां निर्माण कार्य के दौरान स्लैब गिरने से करीब 15 मजदूर उसके साथ नीचे जा गिरे। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में राहत एवं बचाव दल पहुंचाए गए।
मलबे में फंस गए थे मजदूर
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, निर्माणाधीन परिसर में दो इमारतों के बीच स्वतंत्र स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए स्लैब डालने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक स्लैब का हिस्सा ढह गया। शुरुआती सूचना में 10 से 15 मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए फायर ब्रिगेड, पुलिस और आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।
बताया गया कि राहत दलों ने भारी मलबा हटाकर मजदूरों को बाहर निकालने का अभियान चलाया। करीब 15 मजदूरों को रेस्क्यू किया गया। इनमें कुछ मजदूर घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। बाद की रिपोर्टों में सभी 12 रेस्क्यू किए गए मजदूरों की हालत स्थिर बताई गई है और किसी मौत की सूचना नहीं है।
क्रेन से टकराने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे के पीछे निर्माण कार्य के दौरान क्रेन के स्लैब के एक हिस्से से टकराने की आशंका जताई गई है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इस पहलू की पुष्टि तकनीकी जांच और अधिकारियों की रिपोर्ट से होनी बाकी है।
दो दिन बाद सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
हादसे को दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर पर किया जा रहा था। क्या स्लैब डालने से पहले स्ट्रक्चर की पर्याप्त तकनीकी जांच की गई थी? क्या मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम मौजूद थे? और यदि हादसा क्रेन की टक्कर से हुआ तो निर्माण स्थल पर मशीनरी के संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ?
इन सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग को दी गई है और इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की बात सामने आई है।
हादसे ने फिर उठाया निर्माण सुरक्षा का मुद्दा
गांधीनगर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के बीच यह हादसा महज एक दुर्घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी, भारी मशीनरी के इस्तेमाल और तकनीकी निगरानी जैसे मुद्दों की गंभीरता से जांच जरूरी है।
9 सितंबर की रात हुआ हादसा भले ही बड़े जनहानि में तब्दील नहीं हुआ, लेकिन मलबे के नीचे फंसे मजदूरों की तस्वीर ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अगली बार प्रशासन की कार्रवाई हादसे के बाद होगी या उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी।
