ग्रेटर नोएडा में किसानों की महापंचायत: 12 फरवरी को चक्का जाम की चेतावनी
गौतमबुद्ध नगर | नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर विकास प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे हैं। विभिन्न किसान संगठनों ने एकजुट होकर 12 फरवरी को बड़े आंदोलन और चक्का जाम का आह्वान किया है। किसानों का आरोप है कि शासन और प्रशासन स्तर पर बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मूल समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
प्रमुख मांगों पर अड़े किसान
किसान लंबे समय से अपनी जमीनों के बदले वाजिब हक की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन के केंद्र में निम्नलिखित मुख्य मुद्दे हैं:
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10% विकसित प्लॉट: किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें 10 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड दिए जाएं।
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बढ़ा हुआ मुआवजा: पूर्व में हुए भूमि अधिग्रहण के बदले समान दर से मुआवजा राशि में वृद्धि की मांग।
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स्थानीय युवाओं को रोजगार: स्थानीय उद्योगों और विकास प्राधिकरणों में किसान परिवारों के शिक्षित युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी देना।
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आबादी का निस्तारण: गांवों की पुरानी आबादी का विस्तार और उससे जुड़ी समस्याओं का स्थाई समाधान।
ट्रैक्टर मार्च और घेराव की रणनीति
आंदोलन की सफलता के लिए गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि 12 फरवरी को हजारों की संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय का घेराव करेंगे। यदि प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की, तो एक्सप्रेसवे और प्रमुख चौराहों पर चक्का जाम किया जाएगा।
प्रशासन सतर्क, ट्रैफिक डायवर्जन की संभावना
किसानों के इस कड़े रुख को देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। साथ ही, चक्का जाम की स्थिति में आम जनता को असुविधा न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन प्लान पर काम कर रही है।
विकास और न्याय की लड़ाई
किसान संगठनों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत पर किसानों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें लिखित रूप में स्वीकार नहीं होतीं और जमीन पर लागू नहीं की जातीं, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
