मल्टीबैगर स्टॉक चुनने का ‘रामदेव अग्रवाल फॉर्मूला’: टिप्स नहीं, इन 5 बातों का रखें ध्यान
बिजनेस डेस्क: शेयर बाजार में हर निवेशक का सपना होता है कि उसे कोई ‘मल्टीबैगर’ शेयर मिल जाए—यानी ऐसा शेयर जो कुछ ही सालों में उसकी पूंजी को कई गुना बढ़ा दे। लेकिन हजारों कंपनियों के बीच ऐसे हीरे को पहचानना आसान नहीं है। दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने सीएनबीसी-टीवी18 के साथ बातचीत में मल्टीबैगर स्टॉक पहचानने के अपने खास हुनर और अनुभव साझा किए।
अगर आप भी शेयर बाजार से मोटी कमाई करना चाहते हैं, तो रामदेव अग्रवाल के ये 5 मंत्र आपके बहुत काम आ सकते हैं:
1. भीड़ से पहले ‘हीरे’ को पहचानें रामदेव अग्रवाल का सबसे अहम मंत्र है—बाजार की नजर पड़ने से पहले शेयर को पहचानना। उन्होंने ‘बालकृष्ण इंडस्ट्रीज’ का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उन्होंने इसमें निवेश किया था, तब कंपनी का मार्केट कैप केवल 100 करोड़ रुपये था और पी/ई रेशियो (P/E Ratio) मात्र 1 था। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 30-40% होने के बावजूद, बाजार में इसका कोई खरीदार नहीं था। जिन निवेशकों ने उस वक्त कंपनी के फंडामेंटल्स पर भरोसा किया, उन्होंने भारी मुनाफा कमाया।
2. सही वैल्यूएशन का रखें ध्यान (PEG रेशियो) महंगे शेयर खरीदने से बचने के लिए अग्रवाल ‘PEG रेशियो’ (Price/Earnings to Growth) पर जोर देते हैं।
-
नियम: PEG रेशियो 1 या उससे कम होना चाहिए। इसका मतलब है कि ग्रोथ के लिहाज से शेयर का भाव उचित है।
-
वे मानते हैं कि अगर आप ज्यादा PEG वाले महंगे शेयर खरीदते हैं, तो आप शुरुआत में ही अपने संभावित रिटर्न की कुर्बानी दे देते हैं।
3. सिर्फ मुनाफा नहीं, कैश फ्लो भी जरूरी (ROE + वर्किंग कैपिटल) रामदेव अग्रवाल उन कंपनियों को पसंद करते हैं जिनका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) कम से कम 25% हो। लेकिन वे आगाह करते हैं कि सिर्फ ROE देखना काफी नहीं है।
-
वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट: यह देखना जरूरी है कि कंपनी का पैसा बाजार में कितने दिन फंसता है।
-
अगर किसी कंपनी का ROE 25% है, लेकिन उसे अपना पेमेंट मिलने में 100 से 120 दिन लगते हैं, तो अग्रवाल ऐसी कंपनी से दूर रहने की सलाह देते हैं।
4. एशियन पेंट्स का किस्सा: जब हाथ से निकला मौका अनुशासन निवेश में जरूरी है, लेकिन कभी-कभी ज्यादा मोल-भाव भारी पड़ जाता है। अग्रवाल ने अपना एक किस्सा साझा किया जब वे ‘एशियन पेंट्स’ खरीदना चाहते थे। शेयर 20 रुपये पर था, वे 15 का इंतजार कर रहे थे। जब वह 25 पर पहुंचा, वे 20 का इंतजार करने लगे। देखते ही देखते शेयर 90 रुपये पार कर गया और वे एक बड़े मल्टीबैगर से चूक गए। हालांकि, वे कहते हैं कि निवेश में अनुशासन होना चाहिए और उन्हें इस बात का मलाल नहीं है।
5. शॉर्टकट से बचें, प्रमोटर्स को परखें निवेश का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण नियम है—’नो शॉर्टकट’। रामदेव अग्रवाल निवेश करने से पहले कंपनी के प्रमोटर्स से व्यक्तिगत रूप से मिलते हैं। वे उनकी प्रतिबद्धता, प्रोडक्ट की क्वालिटी और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क की गहराई को जांचते हैं। उनका स्पष्ट कहना है, “टिप्स और शॉर्टकट्स से पैसा नहीं बनता। इसके लिए अनुशासन, सही वैल्यूएशन, स्ट्रॉन्ग कैश फ्लो और बिजनेस की गहरी समझ जरूरी है।”
