जापानी बॉन्ड यील्ड में उछाल: भारतीय शेयर बाजार के लिए खतरे की घंटी
मुंबई/टोक्यो: भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेत थोड़े चिंताजनक हो सकते हैं। जापान के बॉन्ड यील्ड (Japanese Bond Yield) में आई हालिया तेजी ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा और नकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है, विशेषकर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के रुख को लेकर।
क्या है पूरा मामला?
जापान ने दशकों तक अपनी ब्याज दरों को शून्य या उसके करीब रखा था, जिसे ‘अल्ट्रा-लूज मॉनेटरी पॉलिसी’ कहा जाता है। लेकिन 2026 की शुरुआत में जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड में उछाल देखा जा रहा है। जब जापान जैसे बड़े देश में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक लिक्विडिटी (नकदी) का प्रवाह बदल जाता है।
भारतीय बाजार पर असर: क्यों भाग सकते हैं FIIs?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण ‘येन कैरी ट्रेड’ (Yen Carry Trade) का बंद होना है:
-
येन कैरी ट्रेड का उलटना: दुनिया भर के बड़े निवेशक जापान से सस्ती दरों पर कर्ज लेकर भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) में पैसा लगाते हैं।
-
कर्ज हुआ महंगा: जापान में यील्ड बढ़ने से वहां से कर्ज लेना महंगा हो जाता है। ऐसे में निवेशकों को अपने जापानी कर्ज को चुकाने के लिए भारतीय बाजार जैसे ऊंचे वैल्यूएशन वाले मार्केट से पैसा निकालना पड़ता है।
-
FII आउटफ्लो का डर: यदि जापानी यील्ड इसी तरह बढ़ती रही, तो भारतीय शेयर बाजार से FIIs की भारी बिकवाली देखी जा सकती है, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बढ़ेगा।
ज़ी बिज़नेस की रिपोर्ट: क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
ज़ी बिज़नेस के अनुसार, भारतीय बाजार की वैल्यूएशन इस समय काफी ऊपर है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर ‘रिस्क-ऑफ’ सेंटीमेंट (जोखिम से बचने की प्रवृत्ति) बनने पर छोटे से नकारात्मक संकेत से भी बाजार में बड़ा करेक्शन आ सकता है। हालांकि, भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत है और DII (घरेलू संस्थागत निवेशक) बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन FII की बिकवाली शॉर्ट-टर्म में अस्थिरता बढ़ा सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों को अभी आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए।
-
जापान और अमेरिका के मुद्रास्फीति (Inflation) डेटा पर कड़ी नजर रखें।
-
आईटी और फार्मा जैसे ‘डिफेंसिव’ सेक्टर्स पर फोकस करें, जो वैश्विक अस्थिरता के दौरान थोड़े स्थिर रहते हैं।
-
बाजार में आने वाली गिरावट का उपयोग अच्छे शेयरों को धीरे-धीरे जमा करने के लिए करें।
