यूपी का ‘सुपरमैन’ कर्मचारी: 17 साल तक बाराबंकी और प्रतापगढ़ से ली सैलरी

jai parkash

प्रतापगढ़/बाराबंकी | उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ और बाराबंकी जिलों में एक साथ सरकारी नौकरी करने वाले जय प्रकाश का ‘डबल रोल’ अब उसे भारी पड़ गया है। कोर्ट ने इस धोखाधड़ी के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त सजा और वसूली का आदेश सुनाया है।

क्या था पूरा मामला?

जय प्रकाश ने साल 2008 के आसपास एक ही समय में दो अलग-अलग जिलों में सरकारी पद हासिल किए थे।

  • बाराबंकी और प्रतापगढ़: वह दोनों जिलों के शिक्षा विभाग या संबंधित सरकारी कार्यालय में कागजों पर मौजूद था।

  • 16 वर्षों का खेल: हैरानी की बात यह है कि 16 साल तक विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी कि उनका एक कर्मचारी दो जगहों से वेतन निकाल रहा है।

  • डिजिटल जांच में फंसे: पैन कार्ड और आधार कार्ड के डिजिटलीकरण और डेटा मिलान के दौरान यह पकड़ में आया कि एक ही व्यक्ति के नाम पर दो अलग-अलग ट्रेजरी से पैसा जा रहा है।

कोर्ट का फैसला और कार्रवाई

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने इसे व्यवस्था के साथ किया गया सबसे बड़ा ‘धोखा’ करार दिया है:

  1. जेल की सजा: कोर्ट ने जय प्रकाश को धोखाधड़ी और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत जेल भेजने का आदेश दिया है।

  2. पाई-पाई की वसूली: 16 सालों में आरोपी ने जो भी वेतन और भत्ते दोनों जगहों से लिए हैं, उस पूरी रकम की वसूली (आरआर) के माध्यम से की जाएगी। इसमें ब्याज भी शामिल हो सकता है।

  3. सेवा समाप्ति: दोनों ही जिलों से उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

विभागों में हड़कंप

इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के अन्य विभागों में भी हड़कंप मचा हुआ है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी कर्मचारियों के डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं और भी कोई ‘जय प्रकाश’ सिस्टम को चूना तो नहीं लगा रहा है।