‘सुपर अल नीनो’ की दस्तक, भारत पर मौसम का डबल अटैक
भीषण हीटवेव से झुलसेगा उत्तर-मध्य भारत; मानसून ‘सामान्य से नीचे’ रहने का अनुमान, केरल में भारी बारिश का अलर्ट
नई दिल्ली। ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम चक्र के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और वैश्विक जलवायु एजेंसियों ने भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ने के कारण इस साल ‘सुपर अल नीनो’ पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसका सीधा असर देश के मानसून और तापमान पर देखने को मिल रहा है, जिससे आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
पारा 46 डिग्री के पार, जून में और सताएगी लू
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में पारा अभी से ही 45°C से 46°C के पार पहुंच चुका है। ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभाव के कारण मई के आखिरी हफ्तों और पूरे जून महीने में भीषण हीटवेव (लू) चलने की आशंका है। इसके साथ ही कई राज्यों में तेज धूल भरी आंधियां (Dust Storms) चलने का भी अनुमान है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।
मानसून पर संकट: सिर्फ 92% बारिश की उम्मीद
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के ‘सामान्य से नीचे’ रहने की प्रबल आशंका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, देश में इस सीजन में औसत बारिश मात्र 92% के आसपास सिमट सकती है। मानसून में होने वाली यह देरी और कमी सीधे तौर पर खरीफ की फसलों (जैसे धान, दलहन) को प्रभावित करेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
मौसम के दो रंग: एक तरफ सूखा, दूसरी तरफ येलो अलर्ट
केरल में भारी बारिश का अनुमान
जहां एक तरफ उत्तर भारत सूखे और गर्मी से बेहाल है, वहीं प्री-मानसून गतिविधियों के कारण दक्षिणी राज्यों, विशेषकर केरल में अचानक मौसम बदल गया है। मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
150 साल पुराना इतिहास दोहराने का डर
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान ‘सुपर अल नीनो’ पिछले 150 वर्षों के इतिहास में सबसे मजबूत और खतरनाक हो सकता है। इसकी तुलना साल 1877 के उस ऐतिहासिक दौर से की जा रही है, जब दुनिया ने भयानक जलवायु संकट का सामना किया था। इसके अलावा, हिमालयी क्षेत्रों में इस साल बर्फबारी सामान्य से करीब 27.8% कम दर्ज की गई है, जिससे आने वाले महीनों में नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट और जल संकट (Water Crisis) गहराने की आशंका है।
पावर ग्रिड और खेती पर बढ़ेगा दबाव
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बिजली संकट: भीषण गर्मी के कारण देश भर में बिजली की मांग (Power Demand) ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने का अनुमान है।
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कृषि पर असर: बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कम पानी वाली फसलें उगाने और जल संचयन पर ध्यान देने की सलाह दी है।
सरकार और आपदा प्रबंधन विभागों को अभी से जल प्रबंधन और बिजली आपूर्ति की रणनीतियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इस दोहरे संकट से निपटा जा सके।
