गुजरात में अब प्रेम विवाह पर ‘माता-पिता’ का होगा पहरा?

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Love Marriage

गांधीनगर। गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने राज्य में प्रेम विवाह (Love Marriage) की प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए ‘विवाह पंजीकरण अधिनियम’ में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। शनिवार, 21 फरवरी 2026 को विधानसभा में पेश किए गए नए मैरिज ड्राफ्ट के अनुसार, अब राज्य में बिना माता-पिता को सूचित किए प्रेम विवाह करना आसान नहीं होगा।

‘सांस्कृतिक आक्रमण’ को रोकने की तैयारी

विधानसभा में इस मसौदे को पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि मौजूदा नियमों की खामियों का लाभ उठाकर कुछ असामाजिक तत्व ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने इसे देश की संस्कृति पर एक ‘सांस्कृतिक आक्रमण’ करार दिया और स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था से अपनी पहचान छिपाकर या माता-पिता को अंधेरे में रखकर की जाने वाली शादियों पर रोक लगेगी।

क्या हैं नए प्रस्तावित नियम?

नए नियमों के लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी:

  • अनिवार्य घोषणा: वर-वधू को आवेदन के साथ यह घोषणा-पत्र देना होगा कि उन्होंने अपने माता-पिता को विवाह की सूचना दी है या नहीं।

  • माता-पिता का विवरण: दूल्हा-दुल्हन को अपने माता-पिता के नाम, आधार नंबर, पता और संपर्क विवरण अनिवार्य रूप से साझा करने होंगे।

  • सरकारी नोटिस: आवेदन मिलने के 10 कार्यदिवस के भीतर सहायक पंजीयक (असिस्टेंट रजिस्ट्रार) द्वारा माता-पिता को विवाह की सूचना भेजी जाएगी।

  • 30 दिन का वेटिंग पीरियड: सभी दस्तावेज और सत्यापन पूरे होने के 30 दिन बाद ही विवाह को कानूनी रूप से पंजीकृत किया जा सकेगा।

  • ऑनलाइन पोर्टल: इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार एक नया ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगी, जहां सारा विवरण अपलोड किया जाएगा।

राजनीतिक समर्थन और कानूनी चुनौतियां

इस प्रस्ताव को सदन में भाजपा के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों का भी समर्थन मिला है। विधायक हेमंत आहिर और लविंगजी ठाकोर ने कहा कि मासूम लड़कियों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए यह समय की मांग है। हालांकि, विधि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यह कदम वयस्कों की ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ‘पसंद के विवाह’ के मौलिक अधिकार को चुनौती दे सकता है।

जनता की राय का इंतजार

सरकार ने इस प्रस्तावित मसौदे पर आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। नागरिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जिसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

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