ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: ‘ग्लोबल टैरिफ’ असंवैधानिक करार
वाशिंगटन/नई दिल्ली (न्यूजहॉक ब्यूरो): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी और विवादास्पद ‘ग्लोबल टैरिफ’ नीति को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है. अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के कुछ ही घंटों बाद, ट्रंप ने पलटवार करते हुए सभी देशों पर 10% आयात शुल्क लगाने का एक नया कार्यकारी आदेश जारी कर दिया है.
संसद के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय पीठ ने 6-3 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया. अदालत ने स्पष्ट किया कि टैरिफ और कर लगाने की शक्ति विशेष रूप से अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास सुरक्षित है. कोर्ट ने कहा कि 1977 का ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ राष्ट्रपति को वह व्यापक अधिकार नहीं देता, जिसका उपयोग ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर शुल्क लगाने के लिए किया था.
ट्रंप की नई ‘कानूनी चाल’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘शर्मनाक’ बताते हुए ट्रंप ने तुरंत हार मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लेकर एक नया आदेश पारित किया है, जिसके तहत 24 फरवरी 2026 से सभी देशों से आने वाले आयात पर 10% शुल्क लागू होगा. हालांकि, कानूनन यह नया टैरिफ केवल 150 दिनों तक ही प्रभावी रह सकता है, जिसके बाद इसे आगे बढ़ाने के लिए संसद की मंजूरी अनिवार्य होगी.
भारत के लिए राहत की खबर
वैश्विक अनिश्चितता के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के संदर्भ में सकारात्मक रुख अपनाया है. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि इस कानूनी लड़ाई का भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र और एक ‘महान व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि भारत के साथ किया गया व्यापार सौदा अब अमेरिका के लिए अधिक निष्पक्ष और फायदेमंद है.
खजाने पर बढ़ेगा बोझ
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. कंपनियों से अब तक वसूले गए अरबों डॉलर के टैरिफ को वापस करने की मांग जोर पकड़ सकती है, जिससे सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ने की आशंका है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का नया 10% शुल्क वाला आदेश भी आने वाले दिनों में कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकता है.
