समाज के दोहरे चेहरे को बेनकाब करती ताप्सी पन्नू की फिल्म ‘अस्सी’
नई दिल्ली: अनुभव सिन्हा, जो हमेशा से ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’ और ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों के जरिए समाज की कड़वी हकीकत पेश करते आए हैं, एक बार फिर ‘अस्सी’ (Assi) के साथ दर्शकों को झकझोरने लौटे हैं। यह फिल्म केवल एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि यह देश की संवेदनशीलता और न्याय प्रणाली पर एक तीखा प्रहार है।
कहानी: एक खौफनाक मंजर और न्याय की गूंज
फिल्म की कहानी दिल्ली में रहने वाली एक मलयाली शिक्षिका परिमा (कनी कुसरुति) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक भयानक रात उसका सामूहिक बलात्कार होता है और उसे रेलवे ट्रैक पर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। फिल्म बलात्कार के उस कृत्य से ज्यादा उसके ‘बाद’ की तबाही पर केंद्रित है—वह दर्दनाक कानूनी प्रक्रिया, पुलिसिया जांच का तरीका और समाज का वह नजरिया जो पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर देता है।
ताप्सी पन्नू यहाँ अधिवक्ता ‘रावी’ की भूमिका में हैं, जो व्यवस्था की खामियों और समाज के सड़े हुए विमर्श से लड़कर परिमा को न्याय दिलाने की कोशिश करती हैं।
फिल्म के मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
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सशक्त अभिनय: कनी कुसरुति ने अपनी खामोशी और आंखों से उस असहनीय दर्द को जिया है। ताप्सी पन्नू ने एक वकील के रूप में परिपक्व और संतुलित प्रदर्शन किया है।
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मर्दानगी की नई परिभाषा: मोहम्मद जीशान अय्यूब ने परिमा के पति के रूप में यह दिखाया है कि एक ‘मर्द’ वह है जो हर हाल में अपनी पत्नी के स्वाभिमान के साथ खड़ा रहे।
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अनुभव सिन्हा का प्रयोग: फिल्म के दौरान हर 20 मिनट में आने वाली लाल स्लाइड्स दर्शकों को भारत में बलात्कार के आंकड़ों से रूबरू कराती हैं, जो फिल्म को और भी डरावना और वास्तविक बना देती हैं।
एक नज़र में फिल्म (At a Glance)
| कैटेगरी | विवरण |
| निर्देशक | अनुभव सिन्हा |
| मुख्य कलाकार | ताप्सी पन्नू, कनी कुसरुति, मोहम्मद जीशान अय्यूब |
| जॉनर | सोशल-लीगल ड्रामा |
| मुख्य विषय | महिला सुरक्षा, न्याय और सामाजिक उदासीनता |
सवाल जो फिल्म आपके पीछे छोड़ जाती है
‘अस्सी’ न्याय मिलने के बाद खत्म नहीं होती, बल्कि यह दर्शकों से कई सवाल पूछती है:
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क्या हमारी कानूनी प्रक्रिया पीड़िता को फिर से प्रताड़ित करने का माध्यम है?
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बलात्कार के मामलों में समाज ‘पीड़ित को शर्मिंदा’ (Victim Shaming) करने वाली सोच से कब आजाद होगा?
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सोशल मीडिया पर चलने वाला ‘मीडिया ट्रायल’ असली न्याय की राह में कितनी बड़ी बाधा है?
यह फिल्म मनोरंजन के लिए नहीं है, यह ‘चेतना’ के लिए है। ‘अस्सी’ आपको असहज करती है, क्योंकि यह वही सच दिखाती है जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। अगर आप गंभीर और सार्थक सिनेमा के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अनिवार्य अनुभव है।
