शेयर बाजार में उधार लेकर सौदेबाजी होगी महंगी, RBI ने नियम किए सख्त
नई दिल्ली | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शेयर बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों द्वारा स्टॉक ब्रोकरों को दिए जाने वाले कर्ज के नियमों को कड़ा कर दिया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इस फैसले का सीधा असर उन छोटे निवेशकों और ट्रेडर्स पर पड़ेगा जो ‘मार्जिन ट्रेडिंग’ के जरिए उधार लेकर शेयरों की खरीद-फरोख्त करते हैं।
बिना 100% सुरक्षा के नहीं मिलेगा कर्ज
आरबीआई के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब बैंकों को ब्रोकरों को किसी भी प्रकार का ऋण या कार्यशील पूंजी (Working Capital) देने के लिए 100% सुरक्षित कोलैटरल (जमानत) लेना अनिवार्य होगा। अब तक ब्रोकर आंशिक गारंटी या कम सुरक्षा पर भी बैंकों से फंड ले पाते थे। अब बैंकों को जितनी रकम ब्रोकर को देनी होगी, उसके बराबर की नकद या सरकारी प्रतिभूतियां अपने पास रखनी होंगी।
छोटे निवेशकों की जेब पर पड़ेगा बोझ
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रोकरों के लिए फंड जुटाना अब महंगा और जटिल हो जाएगा। इसकी भरपाई के लिए ब्रोकर मार्जिन ट्रेडिंग सुविधा (MTF) की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसके अलावा, शेयरों को गिरवी रखकर लिमिट लेने पर 40% का ‘हेयरकट’ अनिवार्य कर दिया गया है। यानी अगर कोई निवेशक 1 लाख रुपये के शेयर गिरवी रखता है, तो उसे केवल 60 हजार रुपये तक की ही ट्रेडिंग लिमिट मिल पाएगी।
सट्टेबाजी पर लगाम लगाने की तैयारी
आरबीआई के इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाजार में अत्यधिक लीवरेज (उधार) के कारण होने वाली अस्थिरता को रोकना है। अक्सर देखा गया है कि ट्रेडर्स उधार के पैसे से बड़े और जोखिम भरे सौदे करते हैं, जिससे बाजार गिरने की स्थिति में उनके डूबने का खतरा बढ़ जाता है। नए नियमों से ऐसी सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर लंबी अवधि के निवेशकों पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे अपनी पूंजी से निवेश करते हैं।
क्या बदलेगा 1 अप्रैल से?
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ब्रोकर बैंक से लिए कर्ज का इस्तेमाल अपनी निजी ट्रेडिंग के लिए नहीं कर सकेंगे।
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गिरवी रखे गए शेयरों की कीमतों की बैंकों द्वारा रोजाना (Daily basis) निगरानी की जाएगी।
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मार्जिन कम होने पर ब्रोकर तुरंत फंड की मांग (Margin Call) करेंगे।
