17 फरवरी को लगने जा रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण

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Surya Grahan

अध्यात्म साल 2026 का पहला खगोलीय और ज्योतिषीय महाआयोजन सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) कल यानी 17 फरवरी, मंगलवार को होने जा रहा है। फाल्गुन मास की अमावस्या को लगने वाला यह ग्रहण ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दौरान राहु और केतु का प्रभाव बढ़ने से शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

यदि आप भी अपनी राशि और जीवन पर इसके नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

सूर्य ग्रहण 2026: समय और तिथि (Surya Grahan 2026 Date & Time)

ज्योतिष गणना के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर से शुरू होकर देर शाम तक चलेगा:

  • तारीख: 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)

  • ग्रहण का प्रारंभ: दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से

  • ग्रहण की समाप्ति: शाम 07 बजकर 57 मिनट पर

सूतक काल और नियम: क्या न करें?

शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान ‘सूतक काल’ प्रभावी होता है, जिसमें कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है:

  1. पूजा-पाठ और स्पर्श: ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें। मंदिर के कपाट बंद रखें और केवल मानसिक जाप करें।

  2. नुकीली वस्तुओं का प्रयोग: कैंची, सुई, चाकू या कोई भी धारदार वस्तु का इस्तेमाल न करें। विशेषकर सिलाई-कढ़ाई से बचें।

  3. भोजन का सेवन: ग्रहण काल के दौरान नया भोजन बनाने और खाने से बचना चाहिए (बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों के लिए नियम शिथिल हैं)।

  4. शारीरिक स्वच्छता: ग्रहण के दौरान नाखून काटना या बाल कटवाना वर्जित माना गया है।

  5. नेगेटिव एनर्जी: सुनसान जगहों या श्मशान के पास जाने से बचें, क्योंकि इस समय नकारात्मक शक्तियां प्रबल होती हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास सलाह

मान्यता है कि ग्रहण की छाया का असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाएं इन बातों का ध्यान रखें:

  • ग्रहण की अवधि में घर से बाहर न निकलें।

  • अपने पास एक साबुत नारियल रखें; माना जाता है कि यह नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है।

  • नुकीली चीजों और सुई-धागे का बिल्कुल भी प्रयोग न करें।

शुभ फल के लिए क्या करें?

  • मंत्रों का जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करें। यह मन को शांत और सकारात्मक रखता है।

  • तुलसी दल का प्रयोग: ग्रहण शुरू होने से पहले ही पीने के पानी और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें।

  • ग्रहण के बाद शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होते ही स्नान करें, घर में गंगाजल छिड़कें और मंदिर की साफ-सफाई करें।

  • दान का महत्व: ग्रहण के बाद अनाज, तिल या वस्त्रों का दान करना दरिद्रता को दूर करता है।

सावधानी: खगोलीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से देखना हानिकारक हो सकता है। इसे देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष चश्मों का ही प्रयोग करें।

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