ईरान-अमेरिका तनाव: क्या ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में है अमेरिका?

0
US Navy

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) में एक बार फिर महायुद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट तस्वीरों ने दुनिया भर की धड़कनें बढ़ा दी हैं। खबर है कि अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली युद्धबेड़े (War Fleet) को तेजी से ईरान की ओर रवाना कर दिया है। इस हलचल के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका ईरान पर किसी बड़े सैन्य हमले की रूपरेखा तैयार कर चुका है?

पेंटागन की बड़ी हलचल: खाड़ी की ओर कूच

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का एक विशाल बेड़ा, जिसमें अत्याधुनिक विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier), मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और घातक पनडुब्बियां शामिल हैं, फारस की खाड़ी (Persian Gulf) की ओर बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य तैनाती सामान्य युद्धाभ्यास नहीं हो सकती।

क्यों बढ़ा अचानक तनाव? 3 मुख्य कारण

  1. क्षेत्रीय ठिकानों पर हमले: पिछले कुछ दिनों में मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेजी आई है, जिसका आरोप अमेरिका ईरान समर्थित गुटों पर लगाता रहा है।

  2. परमाणु संवर्धन: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी गतिरोध और संवर्धन की बढ़ती सीमा ने अमेरिका और उसके सहयोगियों (खासकर इजरायल) को चौकन्ना कर दिया है।

  3. समुद्री मार्ग की सुरक्षा: लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के नाम पर अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है।

“हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।”अमेरिकी रक्षा विभाग का आधिकारिक रुख

ईरान की जवाबी चेतावनी: ‘तैयार है तेहरान’

अमेरिकी बेड़े की हलचल पर ईरान ने भी सख्त तेवर दिखाए हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा है कि उनकी मिसाइलें और नौसेना किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ‘हाई अलर्ट’ पर हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी सीमाओं का उल्लंघन करना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित होगा।

भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?

अगर खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनती है, तो इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति पर पड़ेगा।

  • महंगाई: तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों में महंगाई का संकट गहरा सकता है।

  • सप्लाई चेन: वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, जो पूरी तरह ठप हो सकता है।

फिलहाल स्थिति ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की है। हालांकि अमेरिका इसे एक सुरक्षात्मक कदम बता रहा है, लेकिन युद्धपोतों की यह रफ्तार कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। क्या यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है या फिर किसी बड़े संघर्ष की शुरुआत? पूरी दुनिया की नज़रें अब वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *