SIP का जादू: जानें निवेश पर कब से शुरू होती है असली कमाई
नई दिल्ली: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निवेशकों का भरोसा म्यूचुअल फंड और विशेषकर SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) पर तेजी से बढ़ा है। निवेश के इस तरीके को विशेषज्ञों ने ‘वेल्थ क्रिएशन’ का सबसे सरल और प्रभावी जरिया बताया है। लेकिन अक्सर निवेशक यह सवाल पूछते हैं कि आखिर SIP में रिटर्न का असली ‘जादू’ कब शुरू होता है?
कंपाउंडिंग: धीमी शुरुआत, बड़ा परिणाम
SIP की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) है। शुरुआत के 3 से 5 वर्षों में निवेशक को लग सकता है कि उसका पैसा बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है। लेकिन असली मुनाफा निवेश के 10 या 15 साल पूरे होने के बाद दिखना शुरू होता है। इसे निवेश की भाषा में ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ कहा जाता है, जहाँ समय के साथ मिलने वाला ब्याज आपके मूलधन से भी अधिक हो जाता है।
कब शुरू होता है रिटर्न का असली जादू?
वित्तीय जानकारों के अनुसार, SIP में निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, मुनाफा उतना ही जबरदस्त होगा।
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पहले 5-7 साल: यहाँ आपका निवेश अनुशासन बनाने और एक आधार (Base) तैयार करने का काम करता है।
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10 साल बाद: इस चरण में कंपाउंडिंग का असर दिखने लगता है और रिटर्न की दर तेजी से बढ़ती है।
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15-20 साल: यह वह समय है जिसे ‘मैजिक ऑफ एसआईपी’ कहा जाता है। इस दौरान आपका अर्जित ब्याज आपके द्वारा जमा किए गए कुल निवेश से कई गुना ज्यादा हो सकता है।
रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा
बाजार जब गिरता है, तब आपकी SIP में ज्यादा यूनिट्स खरीदी जाती हैं और बाजार चढ़ने पर कम। इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं। यह तकनीक लंबी अवधि में निवेश की औसत लागत को कम कर देती है, जिससे बाजार के जोखिम कम हो जाते हैं और पोर्टफोलियो स्थिर रहता है।
एक छोटा निवेश, करोड़ों का फंड
यदि कोई निवेशक 25 साल की उम्र में मात्र 5,000 रुपये महीने की SIP शुरू करता है और उसे सालाना 12% का औसत रिटर्न मिलता है, तो 60 साल की उम्र तक यानी 35 वर्षों में वह लगभग 3.2 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकता है। इसमें कुल निवेश मात्र 21 लाख रुपये होगा, जबकि बाकी की राशि केवल कंपाउंडिंग का लाभ होगी।
SIP में निवेश करने वालों के लिए सबसे जरूरी मंत्र है— धैर्य और निरंतरता। बाजार में गिरावट के समय घबराकर SIP बंद करने के बजाय उसे जारी रखना ही लंबी अवधि में करोड़पति बनने का एकमात्र रास्ता है।
डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
