पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे: पूर्वांचल के 133 गांवों में शुरू होगा जमीन अधिग्रहण

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gorakhpur panipat expressway

747 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक व कृषि क्षेत्रों को सीधे जोड़ेगा; पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई संजीवनी।

ब्यूरो, गोरखपुर/पानीपत पूर्वांचल के विकास की तस्वीर बदलने के लिए एक और बड़ी परियोजना धरातल पर उतरने को तैयार है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तावित 747 किलोमीटर लंबे पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दायरे में गोरखपुर-बस्ती मंडल के 133 गांव आएंगे, जहां जल्द ही प्रशासनिक कार्यवाही तेज की जाएगी।

86 किमी का हिस्सा गोरखपुर मंडल में

इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई में से 86.24 किमी का हिस्सा गोरखपुर मंडल में पड़ेगा। यह एक्सप्रेसवे सिद्धार्थनगर जिले के बांसी से प्रवेश करेगा और संतकबीरनगर के मेंहदावल, गोरखपुर के सदर व कैंपियरगंज तहसील होते हुए कुशीनगर के हाटा तक पहुंचेगा।

एनएचएआई ने इस संबंध में चारों संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर भूमि अधिग्रहण की औपचारिक शुरुआत कर दी है। गोरखपुर के डीएम दीपक मीणा के अनुसार, एक्सप्रेसवे का एलाइन्मेंट पहले ही तय किया जा चुका है और जल्द ही भूमि अधिग्रहण अधिकारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

औद्योगिक और कृषि क्रांति का आधार

यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक आर्थिक गलियारा (Economic Corridor) साबित होगा:

  • व्यापारिक जुड़ाव: यह हरियाणा के पानीपत को पूर्वी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों से सीधे जोड़ेगा।

  • किसानों को लाभ: बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों को मंडियों और बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान और सस्ता होगा।

  • रोजगार के अवसर: एक्सप्रेसवे के किनारे नए उद्योग और वेयरहाउस विकसित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए होटल, सर्विस सेक्टर और परिवहन में रोजगार बढ़ेगा।

  • पर्यटन विकास: गोरखपुर और कुशीनगर जैसे धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होने से ट्रैवल और हस्तशिल्प उद्योग को मजबूती मिलेगी।

इन 133 गांवों की बदलेगी तकदीर (तहसीलवार सूची)

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों के गांवों में शुरू होगी:

1. कैंपियरगंज (गोरखपुर): लक्ष्मीपुर (पचवारा), लक्ष्मीपुर (भारीवैसी), मखनहा, ठकुरापार, भरोहिया, गंगापार, रामपुर कैथवलिया, बेलघाट बुजुर्ग, रमवापुर, दोनफा, भइयाराम, जरहद, नयनसर, हिरुआ, बढ़या, चकमाफी, भुइधरपुर, साखी, ताल कोमर, कानापार, नीबा, कंदरखावा।

2. गोरखपुर सदर: बढ़नी, फुलवरिया, सियारामपुर, महराजगंज, ठाकुरपुर (नंबर एक व दो), खुटहन खास, जंगल नाकिन, जंगल डुमरी नंबर एक, रामपुर खुर्द, भिस्वा, इस्मालपुर, रामपुर बुजुर्ग, मेंहदिया, जमुनिया, पोखर भिंडा, समस्तपुर, कोटवा, खिरिया, आराजी बरवा, रामपुर थवईपार, गंभीरपुर कम्हरिया, परशुरामपुर, सोनराइच।

3. बांसी (सिद्धार्थनगर): बंजारी, बिमौआ खुर्द, पचमोहनी, कम्हरिया, बहादुरपुर, डोड़वार शुक्ल, जमोहनी, भावपुर, पिपरा भइया, भटुली, बरनवार, सोनवा माफी, सुहईरनपुरवा, मुड़िला हिर्दन, छपवा, बेलवा लगुनही, पड़िया बुजुर्ग, रोहुआ, महोखवा, बनकटा, कड़जा, बचलाखोर, अकोल्ही, परसा, ढुढ़नी, मझारिया, नगवा, सोनखर, सोनवलिया, मिश्रौलिया तौफिर, सिरसिया, पिपरा शुक्ल।

4. मेंहदावल (संतकबीरनगर): बढ़या, फेउसा, परसा माफी, परसा शुक्ल, महला, पसाई, देवकली, प्रतापपुर, जसवल, रमवापुर, खजुरा खुर्द, नचनी, समोगर, गुदरिहवा, खजुराकला, सिक्टौर माफी, कुंडवा, जमुवरिया खुर्द व कला, रक्सा, भरवलिया मिश्र, कुसोना कला, जमोहरा, मुड़ली, डुमरिया बाबू, इंदरपुर, कौवाठोर, पिड़ारी कला, चितरुखिया।

5. हाटा (कुशीनगर): रामपुर, अगया, होलिया, रामपुर माफी, मगडिहा, सिंदुरिया विशुनपुर, घोड़ादेउर, खुरहुरिया, बलुआ, तुर्कडिहा, बिंदुआर, सहजौली, सेंदुआर, मुंडेरा, खोट्ठा, सिहुलिया, टिकर, छपिया, बेलवा खुर्द, महुअवा, अहिरौली।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल के बीच आर्थिक संतुलन भी मजबूत होगा। 133 गांवों के ग्रामीणों के लिए यह परियोजना बुनियादी सुविधाओं और शहरी सुख-सुविधाओं के विस्तार का द्वार खोलेगी।

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