जोहान्सबर्ग जी-20 समिट: 39 पन्नों का घोषणा पत्र जारी, कई प्रावधानों पर अमेरिका नाराज़
जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)। दक्षिण अफ्रीका की मेज़बानी में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन शनिवार को समाप्त हो गया। समापन के बाद सदस्य देशों ने 39 पन्नों का विस्तृत घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें वैश्विक चुनौतियों, समावेशी विकास, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति पर जोर दिया गया है।
लेकिन इस घोषणा पत्र ने अमेरिका को नाराज़ कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक का बहिष्कार किया और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भी हिस्सा नहीं लिया। व्हाइट हाउस ने इस दस्तावेज़ को जी-20 के ‘‘मूल सिद्धांतों के विपरीत’’ बताया। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने भी ट्रंप के समर्थन में भाग नहीं लिया।
यह पहला मौका है जब जी-20 समिट अफ्रीकी महाद्वीप में आयोजित हुआ।
घोषणा पत्र की मुख्य बातें
1. वैश्विक एकजुटता और बहुपक्षीय सहयोग
घोषणा पत्र में कहा गया कि दुनिया के जटिल राजनीतिक और आर्थिक वातावरण में देशों को बहुपक्षीय सहयोग, नीति समन्वय और सतत विकास की प्रतिबद्धता के साथ काम करना होगा।
2. भू-राजनीतिक तनावों का उल्लेख
बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा, युद्धों, संघर्षों और आर्थिक असमानताओं को गंभीर चुनौती बताते हुए शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता दोहराई गई।
क्षेत्रीय अखंडता पर सख्त संदेश
घोषणा पत्र में किसी देश का नाम लिए बिना रूस, इज़रायल और म्यांमार जैसे विवादित मामलों की ओर संकेत किया गया। इसमें कहा गया: ‘‘कोई भी देश किसी अन्य देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन न करे। विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए।’’ साथ ही, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं को बढ़ावा देने की बात दोहराई गई।
आपदा प्रबंधन पर विशेष फोकस
सबसे संवेदनशील देशों—
-
लघु द्वीप विकासशील राष्ट्र (SIDS)
-
अल्प विकसित देश (LDCs)
के लिए वित्त और क्षमता निर्माण की जरूरत पर बल दिया गया। कहा गया कि उच्च ऋण स्तर गरीब देशों की विकास क्षमता को बाधित कर रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग
ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय संप्रभुता से जोड़ते हुए इसे वैश्विक समृद्धि की कुंजी बताया गया।
दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में बने “स्वैच्छिक ऊर्जा सुरक्षा टूलकिट” की भी सराहना की गई, जिसका उद्देश्य विकासशील देशों को नई ऊर्जा तकनीक, आपातकालीन तैयारी और बुनियादी ढांचा विकास में सहायता देना है।
सतत औद्योगिकीकरण और जलवायु कार्रवाई
घोषणा पत्र में कहा गया:
-
सतत औद्योगिकीकरण सतत विकास और ऊर्जा परिवर्तन की आधारशिला है
-
जी-20 देशों ने उच्च-स्तरीय स्वैच्छिक सिद्धांतों का समर्थन किया
-
जलवायु संकट से निपटने, पर्यावरण संरक्षण, एआई गवर्नेंस और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे पर जोर दिया गया
आतंकवाद की निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया।
PM मोदी के प्रस्तावों को भी मिली जगह
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ड्रग-टेरर नेक्सस’ से लड़ने के लिए चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए, जिनका स्वागत किया गया।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा: “हम अफ्रीकी जी-20 अध्यक्षता की गरिमा को कम नहीं होने देंगे।”
अमेरिकी बहिष्कार के बावजूद यह घोषणा पत्र ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं — जलवायु कार्रवाई, ऋण राहत, समावेशी विकास — को मजबूत दिशा देता है।
सम्मेलन 23 नवंबर को औपचारिक रूप से संपन्न होगा।
