Vridha pension: अब आवेदन नहीं करना होगा, फैमिली ID से मिलेगी पेंशन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वृद्धा पेंशन प्रणाली को फैमिली ID आधारित डिजिटल मॉडल में बदलने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। नई व्यवस्था के बाद बुजुर्गों को आवेदन करने के झंझट से छुटकारा मिलेगा और पेंशन अपने आप पात्र लोगों को मिल जाएगी।
अब पेंशन के लिए आवेदन नहीं करना होगा
नई पेंशन प्रणाली में बुजुर्गों को किसी फॉर्म या दस्तावेज़ के साथ आवेदन नहीं करना पड़ेगा। सरकार फैमिली ID के डेटा से ही यह पता लगा लेगी कि कौन व्यक्ति 60 साल की उम्र पूरी कर चुका है और पेंशन का हकदार है। इसके बाद सरकार ऐसे सभी लोगों से SMS, व्हाट्सऐप या फोन कॉल के माध्यम से उनकी सहमति लेगी।
जवाब न मिलने पर स्थानीय अधिकारी घर जाकर सहमति प्राप्त करेंगे। सहमति मिलते ही 15 दिनों के भीतर पेंशन स्वीकृत कर दी जाएगी।
फैमिली ID क्या है और कैसे काम करेगी?
फैमिली ID एक 12 अंकों की यूनिक पहचान संख्या है, जो—
-
राशन कार्ड
-
सरकारी डेटाबेस
-
जनसंख्या रजिस्टर
इन सभी को जोड़कर हर परिवार का पूरा प्रोफाइल बनाती है। इसके आधार पर सरकार यह पहचान लेगी कि किस परिवार में
-
कौन बुजुर्ग है
-
कौन 60 वर्ष का होने वाला है
-
कौन पेंशन के लिए पात्र है
UP में वृद्धा पेंशन की सुविधाएँ
वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र बुजुर्ग को ₹1,000 प्रति माह सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। यह रकम आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है।
कौन लोग पेंशन के पात्र होंगे?
पेंशन पाने के लिए आयु 60 से 150 वर्ष के बीच हो
-
गरीबी रेखा से नीचे या निर्धारित आय सीमा में हों
-
ग्रामीण क्षेत्र: ₹46,080 वार्षिक
-
शहरी क्षेत्र: ₹56,460 वार्षिक
-
पुरानी और नई प्रणाली में बड़ा अंतर
| पुरानी प्रणाली | नई डिजिटल प्रणाली |
|---|---|
| ऑनलाइन आवेदन ज़रूरी | आवेदन नहीं करना होगा |
| दस्तावेज़ अपलोड करने पड़ते थे | फैमिली ID से स्वतः पहचान |
| फॉर्म की जटिल प्रक्रिया | सिर्फ सहमति देने की आवश्यकता |
| मंजूरी में समय लगता था | 15 दिनों में स्वीकृति |
| कार्यालयों के चक्कर | पूरी प्रक्रिया घर बैठे |
- बुजुर्गों को किसी तरह की पेपरवर्क की ज़रूरत नहीं
- समय की बचत
- फर्जीवाड़ा रोकने में मदद
- सरकारी डाटाबेस से सही लाभार्थी की पहचान
- अधिक पारदर्शी और तेज प्रक्रिया
