आज से होलाष्टक शुरू: अगले 8 दिनों तक शुभ कार्यों पर ‘ब्रेक’

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Holashtak

नई दिल्ली/वाराणसी | फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ ही आज, मंगलवार से होलाष्टक का आरंभ हो गया है। ज्योतिष शास्त्र और हिंदू परंपरा के अनुसार, होली से ठीक आठ दिन पहले की इस अवधि को बेहद संवेदनशील और ‘भारी’ माना जाता है। आज सुबह 7:01 बजे से शुरू हुआ होलाष्टक अगले 8 दिनों तक, यानी 3 मार्च (होलिका दहन) तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी।

क्यों अशुभ माने जाते हैं ये 8 दिन?

होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों को वर्जित मानने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं:

  1. ज्योतिषीय कारण: ज्योतिष गणना के अनुसार, इन 8 दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे ग्रह अपनी ‘उग्र’ (Aggressive) अवस्था में होते हैं। ग्रहों की स्थिति अनुकूल न होने के कारण इस समय शुरू किए गए कार्यों का परिणाम फलदायी नहीं होता।

  2. पौराणिक संदर्भ: माना जाता है कि राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को इन्हीं आठ दिनों में भीषण यातनाएं दी थीं। वहीं, एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने इसी अवधि में कामदेव को भस्म किया था, जिससे प्रकृति में शोक की लहर दौड़ गई थी।

भूलकर भी न करें ये काम

धर्मशास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक के दौरान निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:

  • शादी-ब्याह और सगाई: इस दौरान परिणय सूत्र में बंधना दांपत्य जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता।

  • गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नींव रखना मानसिक अशांति का कारण बन सकता है।

  • नया व्यापार: किसी भी नए प्रतिष्ठान या स्टार्टअप का उद्घाटन टालना चाहिए।

  • बड़ी खरीदारी: नई गाड़ी, सोना, या संपत्ति की रजिस्ट्री होली के बाद करना ही श्रेयस्कर है।

भक्ति और साधना के लिए श्रेष्ठ समय

भले ही भौतिक कार्यों की मनाही हो, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि होलाष्टक में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप और दान-पुण्य करना विशेष समृद्धि और शांति प्रदान करता है।

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