बेकार समझकर न फेंकें रात की बची हुई रोटी, सेहत के लिए है ‘सुपरफूड’
हेल्थ डेस्क | भारतीय घरों में अक्सर रात की बची हुई रोटियों (बासी रोटी) को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है या जानवरों को खिला दिया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो बासी रोटी फेंकने की चीज़ नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है। डाइटीशियनों के अनुसार, ताजी रोटी की तुलना में बासी रोटी कई बीमारियों में दवा की तरह काम करती है।
डायबिटीज और बीपी में रामबाण
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों के लिए बासी रोटी किसी वरदान से कम नहीं है। सुबह के समय ठंडे दूध के साथ बासी रोटी खाने से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। इसके अलावा, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है, उनके लिए भी इसका सेवन फायदेमंद माना गया है, क्योंकि यह शरीर के तापमान और रक्तचाप को संतुलित करने में मदद करती है।
पाचन तंत्र के लिए ‘सुपरफूड’
रोटी बासी होने पर उसमें ‘रेसिस्टेंट स्टार्च’ (Resistant Starch) की मात्रा बढ़ जाती है। यह एक तरह का प्रीबायोटिक है, जो पेट में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है। इससे न केवल कब्ज और एसिडिटी की समस्या दूर होती है, बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। साथ ही, इसमें फाइबर की अधिकता वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए भी इसे एक बेहतर विकल्प बनाती है।
सावधानी: 12 घंटे की समय सीमा का रखें ध्यान
बासी रोटी के फायदे तभी तक हैं, जब तक इसे सही समय पर खाया जाए। विशेषज्ञों ने इसके लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश भी दिए हैं:
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समय सीमा: रोटी बनने के 12 से 15 घंटे के भीतर ही उसका सेवन कर लेना चाहिए। इससे पुरानी रोटी सेहत बिगाड़ सकती है।
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पहचान: यदि रोटी से गंध आ रही हो या वह चिपचिपी (फफूंद) दिखने लगे, तो उसे तुरंत फेंक दें। ऐसी रोटी खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
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स्टोरेज: रोटियों को हमेशा सूती कपड़े में लपेटकर एयरटाइट कंटेनर में ही रखें।
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही संतुलित मात्रा में बासी रोटी के सेवन को लाभकारी बताते हैं। हालांकि, किसी भी पुरानी बीमारी में इसे डाइट का हिस्सा बनाने से पहले अपने चिकित्सक या डाइटीशियन की सलाह अवश्य लें।
