केरलम के राज्यपाल का निर्देश ‘लोकभवन की रसोई में सिर्फ शाकाहारी खाना बनेगा’

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rajpal mathur

तिरुवनंतपुरम। केरलम के नवनियुक्त राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के कार्यभार संभालने के पहले ही दिन लोक भवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने के कथित निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे लोगों की खान-पान संबंधी स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने लोक भवन की उस रसोई में मांसाहारी भोजन तैयार नहीं करने का निर्देश दिया, जहां उनके लिए खाना बनाया जाता है। इस निर्देश के बाद केरलम की राजनीति में बहस शुरू हो गई।

राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, माथुर स्वयं शाकाहारी हैं और यह निर्देश उनके निजी भोजन की व्यवस्था से संबंधित है। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि लोक भवन के अन्य कर्मचारियों के खान-पान पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

कांग्रेस ने बताया व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस निर्देश की आलोचना करते हुए कहा कि केरलम की खान-पान संस्कृति विविधतापूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की स्वतंत्रता है।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत पसंद दूसरों पर नहीं थोपनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में खान-पान की स्वतंत्रता और राज्य की पारंपरिक जीवनशैली का मुद्दा उठाया।

कांग्रेस नेता और राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी कहा कि व्यक्ति क्या खाए, क्या पहने और कौन-सी भाषा बोले, यह उसकी निजी स्वतंत्रता का विषय है।

CPI(M) ने भी जताई आपत्ति

CPI(M) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि भोजन का चुनाव व्यक्तिगत अधिकार है। उन्होंने राज्यपाल की शाकाहारी भोजन की पसंद को स्वीकार करते हुए सवाल उठाया कि क्या यही पसंद दूसरों पर भी लागू की जानी चाहिए।

विपक्षी नेताओं ने इस मामले को वैचारिक राजनीति से जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार के एजेंडे का आरोप भी लगाया। ये आरोप विपक्षी नेताओं के राजनीतिक बयान हैं।

लोक भवन की ओर से क्या सफाई दी गई?

लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, संबंधित रसोई में तैयार भोजन राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को परोसा जाता है। अन्य कर्मचारी अपने घर से खाना लाते हैं या बाहर भोजन करते हैं। सूत्रों ने कहा कि कर्मचारियों की खान-पान संबंधी पसंद पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

इसलिए विवाद का मुख्य प्रश्न यह है कि निर्देश केवल राज्यपाल के निजी भोजन की व्यवस्था तक सीमित है या इसका दायरा व्यापक है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, लोक भवन की ओर से कर्मचारियों पर किसी प्रतिबंध की बात से इनकार किया गया है।

क्यों अहम है यह विवाद?

यह मामला निजी खान-पान की पसंद, सरकारी आवास की व्यवस्थाओं और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भूमिका से जुड़े सवालों को सामने लाता है। जहां राज्यपाल को अपनी व्यक्तिगत भोजन संबंधी पसंद रखने का अधिकार है, वहीं विपक्ष का तर्क है कि ऐसी पसंद दूसरों पर लागू नहीं होनी चाहिए।

फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों में विवाद का केंद्र राज्यपाल के निजी भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाली रसोई का निर्देश है। कर्मचारियों के भोजन पर प्रतिबंध लगाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

 

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