चक्रवात ‘अर्णव’ का खतरा: धान बचाने के लिए दिन-रात कटाई कर रहे किसान
भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के मालकानगिरी जिले में सतर्कता बढ़ा दी गई है। भारी बारिश की आशंका के बीच किसान अपनी तैयार धान की फसल को बचाने के लिए दिन-रात कटाई में जुटे हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने आपदा से निपटने के लिए बचाव दलों को तैयार रहने और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
फसल बचाने के लिए किसानों की भागदौड़
चक्रवात के कारण 26 से 28 अक्टूबर के बीच भारी बारिश होने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान से बचाने के लिए कई क्षेत्रों में कटाई तेज कर दी गई है। कहीं हार्वेस्टर की मदद से धान काटा जा रहा है, तो कहीं मजदूरों को लगाकर फसल घर पहुंचाई जा रही है।
किसानों को डर है कि तेज बारिश और हवा के कारण खेतों में खड़ी फसल गिर सकती है। कटाई के बाद खुले में रखा धान भी भीगने से खराब हो सकता है। इससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कुछ किसान मौसम की आशंका के चलते फसल पूरी तरह पकने से पहले ही कटाई करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, कृषि विभाग ने सलाह दी है कि तैयार फसल की कटाई प्राथमिकता से करें और कटे हुए धान को सुरक्षित, सूखे स्थान पर रखें।
मालकानगिरी में NDRF और ODRAF की तैनाती
संभावित चक्रवात से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 30 सदस्यीय टीम को कालिमेला में तैनात करने की तैयारी की गई है। वहीं, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 36 सदस्यीय टीम माथिली में मोर्चा संभालने के लिए तैयार है।
अग्निशमन विभाग की टीमों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।
29 अक्टूबर तक स्कूल-कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
मौसम की आशंका और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मालकानगिरी जिले में स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्रों को 29 अक्टूबर तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है। सतीगुड़ा क्षेत्र में आयोजित खेल गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है।
प्रशासन का उद्देश्य खराब मौसम के दौरान बच्चों और आम नागरिकों की आवाजाही कम करना तथा किसी भी संभावित आपात स्थिति में जोखिम को घटाना है।
निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निचले इलाकों और कमजोर कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थानों और चक्रवात आश्रय स्थलों में पहुंचाया जाएगा।
जिले के स्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों के साथ अस्थायी आश्रय स्थलों को भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता है कि भारी बारिश या तेज हवाओं की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
किसानों के लिए क्या है सलाह?
मौसम खराब होने की आशंका के बीच किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है:
- जो धान पककर तैयार हो चुका है, उसकी कटाई जल्द करें।
- कटे हुए धान को खुले खेतों में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें।
- खेतों में पानी जमा होने से रोकने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करें।
- कच्ची फसल को जल्दबाजी में काटने से पहले कृषि विभाग की सलाह लें।
- मौसम और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों पर नजर रखें।
ओडिशा के अन्य जिलों में भी सतर्कता
चक्रवात ‘अर्णव’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने दक्षिणी जिलों में भी तैयारियां तेज की हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कुछ हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। संवेदनशील क्षेत्रों में बचाव दलों को तैयार रखा जा रहा है और लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
चक्रवात ‘अर्णव’ की आशंका ने मालकानगिरी के किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर किसान अपनी सालभर की मेहनत से तैयार धान की फसल बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन लोगों की सुरक्षा और राहत-बचाव की तैयारियों में लगा है। आने वाले दिनों में बारिश और हवा की तीव्रता के आधार पर नुकसान की स्थिति स्पष्ट होगी।
