पाकिस्तान में LPG संकट से हाहाकार, 7000 रुपये का हुआ गैस सिलेंडर
इस्लामाबाद। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अब एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईरान से गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। हालात यह हैं कि 12 किलो का गैस सिलेंडर करीब 7,000 पाकिस्तानी रुपये में बिक रहा है। महंगी गैस का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। लाहौर में कई रिक्शा चालक अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए खाने तक में कटौती करने को मजबूर हैं।
ईरान बॉर्डर बंद होने से बिगड़े हालात
पाकिस्तान में एलपीजी संकट की बड़ी वजह ईरान के साथ सीमा पर व्यापारिक आवाजाही प्रभावित होना बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अक्टूबर से ईरान के दो सीमा मार्ग बंद होने के कारण पाकिस्तान आने वाले एलपीजी टैंकरों की सप्लाई बाधित हो गई। इससे बाजार में गैस की उपलब्धता कम हो गई और कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं।
पाकिस्तान एलपीजी एसोसिएशन के अनुसार, सीमा बंद होने से पहले ईरान से रोजाना करीब 7,000 मीट्रिक टन एलपीजी पाकिस्तान पहुंचती थी। सप्लाई रुकने के कारण घरेलू बाजार में गैस की कमी पैदा हो गई।
कुछ ही दिनों में 56 प्रतिशत महंगा हुआ सिलेंडर
पाकिस्तानी व्यापारियों के मुताबिक, 12 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत कुछ ही दिनों में करीब 56 प्रतिशत बढ़कर 7,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई। खुले बाजार में एलपीजी लगभग 583 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है।
इस अचानक हुई महंगाई ने उन लोगों की कमर तोड़ दी है, जो रोजाना कमाई करके अपने परिवार का पेट पालते हैं।
1800 रुपये कमाने वाला रिक्शा चालक अब 800 रुपये पर पहुंचा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर में पिछले 13 वर्षों से रिक्शा चला रहे 33 वर्षीय राशिद अली की कहानी इस संकट की गंभीरता बताती है। राशिद सुबह 6 बजे काम शुरू करते हैं और कई बार आधी रात तक रिक्शा चलाते हैं।
पहले वह रोजाना करीब 1,700 पाकिस्तानी रुपये (लगभग 6.50 डॉलर) कमा लेते थे, जिससे परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाती थीं। लेकिन एलपीजी महंगी होने के बाद उनकी रोजाना कमाई घटकर करीब 800 रुपये (लगभग 3 डॉलर) रह गई है।
राशिद के मुताबिक, अब उनके परिवार को दिन में तीन की जगह सिर्फ दो वक्त का खाना खाना पड़ रहा है। उनके दो छोटे बच्चे हैं और परिवार का खर्च चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
महंगी गैस के बाद भी किराया बढ़ाने को तैयार नहीं यात्री
रिक्शा चालकों की परेशानी सिर्फ महंगी गैस तक सीमित नहीं है। ईंधन की लागत बढ़ने के बावजूद यात्री किराया बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
राशिद बताते हैं कि जिस यात्रा का किराया 200 से 250 रुपये होना चाहिए, उसके लिए यात्री 80, 100 या अधिकतम 150 रुपये ही देने को तैयार होते हैं। ऐसे में रिक्शा चालकों के लिए रोजाना खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
43 हजार रिक्शा चालकों पर संकट
अवामी रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष मजीद गौरी के मुताबिक, यूनियन से करीब 43 हजार ऑटो रिक्शा जुड़े हैं। इनमें लगभग 70 प्रतिशत रिक्शा एलपीजी से चलते हैं। इसके अलावा करीब 8 हजार किंगकी थ्री-व्हीलर भी एलपीजी पर निर्भर हैं।
उन्होंने एलपीजी को गरीबों का ईंधन बताते हुए कहा कि इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब परिवारों और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ रहा है।
महंगाई ने बढ़ाई पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें
पाकिस्तान में एलपीजी संकट ऐसे समय आया है, जब देश पहले से ही महंगाई और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से परेशान है। अक्टूबर 2026 में देश की महंगाई दर बढ़कर 9.6 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने ऊर्जा और गेहूं की कीमतों का हवाला देते हुए ब्याज दर बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी है।
पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें भी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में करीब 40 प्रतिशत अधिक बताई जा रही हैं।
इस बीच पाकिस्तान सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए चार सरकारी कंपनियों को दोबारा आयात कारोबार में शामिल करने और जरूरतमंद परिवारों को रियायती दरों पर गैस उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा की है।
पाकिस्तान में बढ़ता एलपीजी संकट अब केवल ईंधन की महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी, रोजगार और परिवारों की भोजन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है।
