चीन ने ‘मौत के रेगिस्तान’ में उगाई हरियाली

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Taklamakan Desert

बीजिंग। चीन के विशाल तकलामकन रेगिस्तान को लेकर एक चौंकाने वाली पर्यावरणीय खबर सामने आई है। करीब पांच दशक से चल रहे बड़े पैमाने के हरित अभियान के बाद रेगिस्तान के आसपास का क्षेत्र अब वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने वाले कार्बन सिंक के रूप में काम करता दिखाई दे रहा है। सैटेलाइट डेटा और वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस बदलाव की पुष्टि की है।

50 साल से जारी है हरित अभियान

चीन ने वर्ष 1978 में ‘थ्री-नॉर्थ शेल्टरबेल्ट प्रोग्राम’ शुरू किया था। इसे चीन की ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य रेगिस्तान के विस्तार को रोकना, रेत के तूफानों और मिट्टी के कटाव को कम करना तथा खेती और आबादी वाले इलाकों को मरुस्थलीकरण से बचाना था।

तकलामकन जैसे बेहद शुष्क इलाके में रेगिस्तान के अंदर बड़े जंगल खड़े करने के बजाय उसके किनारों पर पेड़, झाड़ियां और शेल्टरबेल्ट विकसित करने पर जोर दिया गया। पहाड़ों से मिलने वाले पिघले पानी और सिंचाई व्यवस्था ने इस हरियाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

3,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबा हरित घेरा

रिपोर्ट के अनुसार, तकलामकन के आसपास 3,000 किलोमीटर से अधिक लंबा हरित घेरा तैयार किया गया है। कुछ रिपोर्टों में पिछले करीब 50 वर्षों में लगाए गए पेड़ों की संख्या 66 अरब तक बताई गई है। इस हरियाली ने रेगिस्तान के किनारों के पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ा बदलाव किया है।

नए सैटेलाइट आंकड़ों से पता चलता है कि इस क्षेत्र में वनस्पति बढ़ने के साथ प्रकाश संश्लेषण की गतिविधि भी बढ़ी है। नतीजा यह है कि अध्ययन किए गए क्षेत्र में कार्बन का अवशोषण उसके उत्सर्जन से अधिक हो गया है।

जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में अहम उपलब्धि

वैज्ञानिकों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि उचित योजना, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधों और पर्याप्त जल प्रबंधन के जरिए बेहद शुष्क क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर पारिस्थितिक सुधार संभव है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रेगिस्तानी इलाकों में वृक्षारोपण के साथ पानी की उपलब्धता और स्थानीय पारिस्थितिकी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

तकलामकन में चीन का यह प्रयोग अब दुनिया के उन बड़े पर्यावरणीय अभियानों में शामिल हो गया है, जिन पर जलवायु परिवर्तन और मरुस्थलीकरण से निपटने के नजरिए से नजर रखी जा रही है।

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