प्रोफेशनल टैक्स बनाम आयकर: क्या है अंतर और किसे चुकाना होता है यह टैक्स?
नई दिल्ली: भारत में कमाई करने वाले व्यक्तियों को कई तरह के टैक्स देने होते हैं। इनमें आयकर (Income Tax) सबसे प्रमुख है, लेकिन इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण टैक्स है जिसे ‘प्रोफेशनल टैक्स’ (PT) कहा जाता है। अक्सर लोग इन दोनों के बीच भ्रमित रहते हैं, जबकि ये दोनों कर अलग-अलग आधार पर और अलग-अलग संस्थाओं द्वारा वसूले जाते हैं।
क्या है प्रोफेशनल टैक्स?
प्रोफेशनल टैक्स एक प्रकार का प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) है जिसे राज्य सरकारें उन व्यक्तियों पर लगाती हैं जो नौकरी, व्यापार या किसी विशेष पेशे (जैसे डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट) से आय कमाते हैं। यह पूरी तरह से राज्य सरकार का विषय है, इसलिए इसकी दरें और नियम अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकते हैं。
आयकर से कैसे अलग है यह टैक्स?
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वसूली करने वाली संस्था: आयकर केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है, जबकि प्रोफेशनल टैक्स राज्य सरकारों द्वारा लगाया और वसूला जाता है。
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अधिकतम सीमा: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 276 के अनुसार, प्रोफेशनल टैक्स की अधिकतम सीमा 2,500 रुपये सालाना तय की गई है। वहीं आयकर की कोई अधिकतम सीमा नहीं होती; यह आपकी कमाई बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है。
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टैक्स छूट: आयकर अधिनियम, 1961 के तहत भुगतान किए गए प्रोफेशनल टैक्स को आपकी कुल कर योग्य आय (Taxable Income) से घटाया जा सकता है, जिससे आपकी आयकर देनदारी थोड़ी कम हो सकती है。
किसे देना होता है यह टैक्स?
जिन राज्यों में यह टैक्स लागू है, वहां निम्नलिखित लोगों को यह चुकाना पड़ता है:
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नौकरीपेशा कर्मचारी: नियोक्ता (Employer) कर्मचारी की सैलरी से यह टैक्स काटकर राज्य सरकार को जमा करता है。
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पेशेवर (Professionals): डॉक्टर, वकील, सलाहकार आदि को यह खुद जमा करना होता है。
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व्यवसायी: कई राज्यों में व्यापार करने वाले लोगों को भी उनकी आय के आधार पर यह कर देना होता है。
किन राज्यों में लगता है प्रोफेशनल टैक्स?
यह टैक्स पूरे देश में लागू नहीं है। वर्तमान में गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में यह प्रभावी है। वहीं दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स नहीं वसूला जाता है。
प्रोफेशनल टैक्स आपकी ‘टेक-होम सैलरी’ को थोड़ा कम करता है, लेकिन कर नियोजन के नजरिए से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी कटौती आयकर में लाभ दिलाती है। यदि आप स्वरोजगार में हैं, तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप अपने राज्य के नियमों के अनुसार समय पर इसका भुगतान कर रहे हैं。
