One Time Road Tax को ड्राइवरों ने बताया ‘काला कानून’
लखनऊ | उत्तर प्रदेश में पंजीकृत टैक्सी गाड़ियों पर लगाए गए नए रोड टैक्स नियमों को लेकर टैक्सी चालकों और ड्राइवर संगठनों में भारी आक्रोश है। ड्राइवरों ने इसे ‘काला कानून’ करार देते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने या इसमें न्यायसंगत संशोधन करने की पुरजोर मांग की है। उत्तर प्रदेश में वाणिज्यिक वाहनों (Commercial Vehicles) के लिए लागू की गई नई टैक्स प्रणाली ने बड़े विवाद का रूप ले लिया है। राज्य के कई हिस्सों में ट्रैवल एजेंटों और ट्रांसपोर्टरों ने 30 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए इस ‘एकमुश्त रोड टैक्स’ (One-time Tax) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है
आर्थिक तंगी और अतिरिक्त बोझ
टैक्सी चालकों का कहना है कि वे पहले से ही बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में रोड टैक्स में की गई बढ़ोतरी उनके ऊपर एक अतिरिक्त और असहनीय वित्तीय बोझ डालती है। कई ड्राइवरों का तर्क है कि उनकी दैनिक आय का बड़ा हिस्सा गाड़ियों की किस्तों और मेंटेनेंस में चला जाता है, जिसके बाद परिवार पालना भी मुश्किल हो रहा है।
विरोध की मुख्य वजहें: आखिर क्यों नाराज हैं ट्रांसपोर्टर?
ट्रांसपोर्टर और ट्रैवल कारोबारियों ने इस नए नियम को ‘अन्यायपूर्ण’ करार देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं:
-
दोहरे टैक्स की मार: विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यह नियम पुरानी गाड़ियों पर भी लागू किया जा रहा है। आरोप है कि पुरानी गाड़ियों द्वारा पहले जमा किए गए टैक्स की राशि को घटाए बिना ही नया नियम थोपा जा रहा है, जिससे उन्हें दोहरा टैक्स देना पड़ रहा है।
-
परमिट बनाम टैक्स का गणित: एसोसिएशन का तर्क है कि जब परिवहन विभाग वाणिज्यिक वाहनों को केवल 5 साल के लिए परमिट जारी करता है, तो उनसे 15 साल का रोड टैक्स एक साथ क्यों वसूला जा रहा है?
-
वित्तीय संकट: पहले टैक्स त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर जमा होता था, लेकिन अब 15 साल की रकम एक साथ मांगने से छोटे ट्रांसपोर्टरों और मध्यम वर्गीय ट्रैवल कारोबारियों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है。
ड्राइवर संगठनों की प्रमुख मांगें:
ड्राइवर संगठनों ने इस निर्णय की घोर निंदा करते हुए सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
-
नियमों की वापसी या संशोधन: अन्यायपूर्ण रोड टैक्स कानून को तुरंत रद्द किया जाए या व्यावहारिक आधार पर उसमें बदलाव किए जाएं।
-
वास्तविक आय का आकलन: सरकार टैक्स निर्धारित करते समय टैक्सी चालकों की जमीनी हकीकत और उनकी वास्तविक आय पर ध्यान दे।
-
संवाद से समाधान: सरकार केवल एकतरफा निर्णय न ले, बल्कि ड्राइवर संगठनों के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर इस समस्या का हल निकाले।
-
रोड टैक्स में राहत: आर्थिक रूप से कमजोर चालकों को ध्यान में रखते हुए विशेष राहत पैकेज या टैक्स छूट की व्यवस्था की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
विभिन्न टैक्सी यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों को अनसुना करती है, तो वे प्रदेश स्तर पर बड़े विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। “हम सरकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारे पेट पर लात मारकर बनाए गए नियमों को बर्दाश्त नहीं करेंगे,” यह कहना है प्रदेश के एक प्रमुख टैक्सी यूनियन के सदस्य का।
ट्रांसपोर्टरों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया या इसमें व्यावहारिक संशोधन नहीं किया, तो उनका प्रदर्शन और उग्र होगा।
अब सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह इन लाखों ड्राइवरों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई नरम रुख अपनाती है या नहीं।
