यशोदा जयंती: इंदौर में है देश का इकलौता यशोदा माता मंदिर, सूनी गोद भरने की है विशेष मान्यता

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Yashoda Jayanti

इंदौर: आज (7 फरवरी ) देशभर में यशोदा जयंती मनाई जा रही है। इस खास मौके पर मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित खजूरी बाजार का यशोदा माता मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है जहाँ मां यशोदा की मुख्य रूप से पूजा की जाती है।

350 साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर

यह मंदिर करीब 220 से 350 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा की गोद में बाल रूप में विराजमान हैं। मंदिर में मां यशोदा की प्रतिमा बड़ी है और नंद बाबा की प्रतिमा छोटी है, जो इसे और भी दुर्लभ बनाती है।

संतान प्राप्ति के लिए अनूठी परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर निःसंतान दंपतियों के लिए आशा की किरण है। यहाँ एक विशेष परंपरा है:

  • गोद भराई की रस्म: ऐसी मान्यता है कि जिन महिलाओं की गोद सूनी है, वे यहाँ आकर माता यशोदा की गोद भरती हैं।

  • गुरुवार का महत्व: हर गुरुवार को यहाँ गोद भराई की रस्म की जाती है, जिसमें महिलाएं चावल, नारियल और चुनरी अर्पित करती हैं।

  • मन्नत पूरी होने पर आभार: श्रद्धालु बताते हैं कि संतान प्राप्ति के बाद वे दोबारा यहाँ आकर धन्यवाद स्वरूप फिर से गोद भराई की रस्म पूरी करते हैं।

सपनों से जुड़ी कहानी

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण आनंदीलाल दीक्षित ने करवाया था। कहा जाता है कि उन्हें सपना आया था कि जो महिलाएं यहाँ आकर माता यशोदा की गोद भरेंगी, उन्हें यशस्वी संतान की प्राप्ति होगी। तभी से यह अटूट विश्वास और परंपरा चली आ रही है।

यशोदा जयंती और जन्माष्टमी के दौरान यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इंदौर ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग अपनी मन्नत लेकर इस पावन दरबार में पहुँचते हैं।

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