बिना इजाजत किताब छापना या बांटना अब बड़ा अपराध
नई दिल्ली | पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरणात्मक किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) के डिजिटल लीक होने के बाद कानूनी सरगर्मी बढ़ गई है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर किताब की कथित पीडीएफ फाइल वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर भारत में सख्त ‘कॉपीराइट कानून’ और उसके तहत होने वाली सजाओं को चर्चा में ला दिया है।
अभी आधिकारिक तौर पर रिलीज भी नहीं हुई है किताब
किताब के प्रकाशक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की इस किताब के पब्लिशिंग राइट्स पूरी तरह उनके पास हैं। प्रकाशक के अनुसार, यह किताब अभी तक न तो प्रिंट में आई है और न ही डिजिटल रूप में इसे सार्वजनिक किया गया है। ऐसे में इंटरनेट पर उपलब्ध कोई भी कॉपी पूरी तरह से गैर-कानूनी और पायरेसी का हिस्सा है।
क्या कहता है कानून?
भारत में कॉपीराइट अधिनियम, 1957 लेखकों और प्रकाशकों के अधिकारों की रक्षा करता है। कानून के जानकारों के मुताबिक:
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सजा का प्रावधान: बिना अनुमति के किसी किताब को छापना, स्कैन करना, उसकी पीडीएफ बनाना या डिजिटल रूप से शेयर करना संज्ञेय अपराध है। इसके लिए 6 महीने से लेकर 3 साल तक की जेल हो सकती है।
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आर्थिक दंड: दोषी व्यक्ति पर 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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डिजिटल पायरेसी: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के दौर में डिजिटल कॉपी का अवैध वितरण भी उतना ही गंभीर माना जाता है जितना कि भौतिक किताब की पायरेसी।
पब्लिशर्स की अपील: पायरेसी से बचें
पब्लिशिंग हाउस ने चेतावनी दी है कि वे इस गैर-कानूनी वितरण के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाट्सएप या टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसी फाइलों को फॉरवर्ड करना भी आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। यदि किसी लेखक या प्रकाशक की बौद्धिक संपदा का उल्लंघन होता है, तो वे सिविल कोर्ट में हर्जाने का मुकदमा और पुलिस में क्रिमिनल केस, दोनों दर्ज करा सकते हैं।
यह मामला लेखकों की मेहनत और प्रकाशकों के निवेश की सुरक्षा के प्रति समाज और कानून की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।
