महाशिवरात्रि: माता पार्वती ने लिए 108 जन्म, तब शिवजी को पति के रूप में पाया
नई दिल्ली: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इस मिलन के पीछे युगों-युगों का इंतजार और कठोर तपस्या छिपी है।
108 जन्मों का सफर
कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कुल 108 बार जन्म लिया था। अपने 107 जन्मों तक वह महादेव को प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाईं। अंततः अपने 108वें जन्म में, जब उन्होंने पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्म लिया, तब उनकी तपस्या सफल हुई।
कठोर तप और नारद जी का मार्गदर्शन
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बचपन से भक्ति: माता पार्वती बचपन से ही महादेव की अनन्य भक्त थीं।
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तपस्या का मार्ग: नारद मुनि के सुझाव पर उन्होंने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए जंगलों में जाकर कठोर तप शुरू किया। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया और कड़ाके की ठंड व भीषण गर्मी में भी अपनी साधना जारी रखी।
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अंतिम जन्म में मिलन: माता की इस अटूट श्रद्धा और 108वें जन्म की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
महाशिवरात्रि का महत्व
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ही शिव और शक्ति का यह दिव्य मिलन हुआ था। इसीलिए महाशिवरात्रि को गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह प्रेम, समर्पण और विश्वास का सबसे बड़ा उदाहरण है।
इस दिन भक्त रात के चार प्रहर में पूजा करते हैं और महादेव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
