यूपी में मौसम का यू-टर्न: बर्फीली हवाओं ने बढ़ाई गलन
लखनऊ | उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड से राहत मिलने की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिरता नजर आ रहा है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण मैदानी इलाकों में मौसम ने करवट ले ली है। राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में तेज पछुआ हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने 1 फरवरी से राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है।
20 से 30 किमी की रफ्तार से चल रही हैं ठंडी हवाएं
पिछले 24 घंटों में लखनऊ और आसपास के जिलों में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली बर्फीली हवाओं ने गलन पैदा कर दी है। आलम यह है कि दिन में चटख धूप निकलने के बावजूद लोगों को ठंड से राहत नहीं मिल रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन हवाओं के कारण दिन के अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है।
1 और 2 फरवरी को बारिश के आसार
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों में दस्तक दे चुका है। इसका असर 1 फरवरी से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य इलाकों में दिखाई देगा।
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पश्चिमी यूपी: मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
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पूर्वी और मध्य यूपी: लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज में बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी की संभावना है।
किसानों की बढ़ी चिंता
अचानक मौसम में आए इस बदलाव और बारिश की चेतावनी ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश के साथ ओलावृष्टि होती है, तो सरसों और आलू की तैयार फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे फिलहाल सिंचाई रोक दें और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
कोहरे का भी रहेगा प्रकोप
बारिश के बाद वातावरण में नमी बढ़ने से एक बार फिर घना कोहरा छाने की आशंका है। विशेष रूप से तराई वाले इलाकों में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होने की संभावना है। स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों और बच्चों को इस बदलती ठंड से बचने की सलाह दी है।
