28 जिलों को मिलाकर ‘पूर्वांचल’ राज्य बनाने की उठी मांग

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ब्यूरो/अमेठी देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के विभाजन की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई है। अमेठी में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने उत्तर प्रदेश को बांटकर अलग ‘पूर्वांचल राज्य’ बनाने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। नेताओं का दावा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह नया राज्य अस्तित्व में आ सकता है।

प्रशासनिक सुगमता और विकास का हवाला

डॉ. संजय सिंह ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी (लगभग 25 करोड़) को एक ही केंद्र से नियंत्रित करना प्रशासनिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, “जब राज्य बहुत बड़ा होता है, तो विकास की किरणें हर कोने तक नहीं पहुंच पातीं। पूर्वांचल के विकास और वहां के लोगों को उनका हक दिलाने के लिए विभाजन अनिवार्य है।”

प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य का स्वरूप

प्रस्तावित नए राज्य को लेकर जो खाका खींचा गया है, उसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • शामिल जिले: वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, अयोध्या, अमेठी, मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, बस्ती, कुशीनगर सहित कुल 28 जिले

  • मंडल: उत्तर प्रदेश के 8 मंडलों को काटकर यह नया राज्य बनाने का प्रस्ताव है।

  • आबादी: करीब 7.98 करोड़ की आबादी के साथ यह भारत का 14वां सबसे बड़ा राज्य बनेगा।

  • संसाधन: डॉ. अमीता सिंह के अनुसार, पूर्वांचल के पास उपजाऊ जमीन और मेहनती युवा हैं, जो इस नए राज्य को ‘भारत का जापान’ बनाने की क्षमता रखते हैं।

‘संयुक्त संकल्प मंच’ के जरिए तेज होगा आंदोलन

इस मांग को अमली जामा पहनाने के लिए ‘पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच’ के गठन की घोषणा की गई है। यह मंच अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को एक साथ लाकर दिल्ली और लखनऊ की सरकारों पर दबाव बनाने का काम करेगा।

राजनीतिक चुनौतियां और सीएम योगी का रुख

पूर्वांचल राज्य की यह मांग आगामी चुनावों से पहले भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समय-समय पर राज्य के विभाजन का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि उत्तर प्रदेश की ताकत उसकी एकता में है और एकजुट रहकर ही राज्य को उत्तम प्रदेश बनाया जा सकता है।

“पूर्वांचल की अपनी अलग भाषा और संस्कृति है, जिसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है। हमें अपना हक चाहिए ताकि यहां का युवा पलायन करने के बजाय अपने राज्य को समृद्ध बनाए।” — डॉ. अमीता सिंह, पूर्व मंत्री

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