भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का ऐलान
नई दिल्ली | भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज व्यापारिक दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। करीब 18 वर्षों के लंबे इंतजार और मैराथन वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया है, जो न केवल व्यापार बल्कि वैश्विक कूटनीति की दिशा भी बदलेगा।
ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच भारत का बड़ा कदम
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ के साथ यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेगी, जिससे अमेरिकी बाजार में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।
क्या सस्ता होगा और किसे मिलेगा लाभ?
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गाड़ियां और वाइन: यूरोपीय कारों (जैसे BMW, Mercedes, VW) पर लगने वाला 110% तक का आयात शुल्क अब घटकर शुरुआती तौर पर 40% रह जाएगा। वहीं, यूरोपीय वाइन और प्रीमियम उत्पादों की कीमतें भी कम होंगी।
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निर्यात को पंख: भारत के कपड़ा (Textile), जूता-चप्पल (Footwear), रत्न एवं आभूषण और फार्मा सेक्टर को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। इससे लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
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आईटी और सेवाएं: भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों के लिए यूरोप में काम करना और सेवाएं देना अब पहले से कहीं अधिक आसान होगा।
किसानों और डेयरी सेक्टर का रखा गया ख्याल
भारत ने इस डील में अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और डेयरी को बाहर रखा है। इसका मतलब है कि यूरोपीय डेयरी उत्पादों से भारतीय किसानों के हितों को कोई खतरा नहीं होगा। सरकार ने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए ‘सेफगार्ड क्लॉज’ का भी प्रावधान किया है।
प्रमुख आंकड़े और लक्ष्य
| विवरण | वर्तमान स्थिति | लक्ष्य (अगले 10 वर्ष) |
| द्विपक्षीय व्यापार | $136 अरब | $200 अरब से अधिक |
| शुल्क कटौती | 90% से अधिक उत्पादों पर | लगभग शून्य शुल्क |
| उपभोक्ता आधार | 1.4 अरब (भारत) | 45 करोड़ (EU) |
कब से लागू होगा समझौता?
आज औपचारिक घोषणा के बाद, समझौते के मसौदे की कानूनी जांच (Legal Scrubbing) की जाएगी। संभावना है कि साल के अंत तक हस्ताक्षर होने के बाद, 2027 की शुरुआत से यह पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
“भारत और यूरोपीय संघ का यह साथ केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक खंडित दुनिया के लिए स्थिरता और भरोसे का संदेश है।” — उर्सुला वॉन डेर लेयेन, अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग
