शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ स्वाहा

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नई दिल्ली | घरेलू शेयर बाजार के लिए हफ्ता का आखिरी कारोबारी दिन ‘अमंगल’ साबित हुआ। शुरुआती तेजी के बाद दोपहर के सत्र में बाजार अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस बिकवाली के तूफान में बीएसई (BSE) का सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा फिसल गया, जबकि एनएसई (NSE) का निफ्टी 25,050 के स्तर से नीचे लुढ़क गया। बाजार में आई इस गिरावट के कारण महज कुछ घंटों में निवेशकों की ₹6 लाख करोड़ की संपत्ति डूब गई।

बाजार का हाल: क्या रहा सूचकांकों का स्तर?

सेंसेक्स सुबह 82,335.94 के स्तर पर बढ़त के साथ खुला था और एक समय यह 82,516 के हाई पर पहुंच गया था, लेकिन मुनाफावसूली के दबाव में यह 81,500 के आसपास सिमट गया। वहीं, निफ्टी-50 भी 25,280 के स्तर से गिरकर 25,034 के निचले स्तर पर आ गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1.5% से अधिक की भारी गिरावट देखी गई।

बाजार टूटने के 4 प्रमुख कारण

  1. विदेशी निवेशकों (FII) की रिकॉर्ड बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जनवरी में लगातार 13वें सत्र में भारी बिकवाली की है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट पूरी तरह बिगड़ गया है।

  2. डोनाल्ड ट्रंप का ‘टैरिफ अटैक’: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नए ट्रेड टैरिफ की धमकियों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी पर पड़ा है।

  3. निराशाजनक तिमाही नतीजे (Q3 Results): इंडिगो (मुनाफा 77% घटा), सिप्ला (मुनाफा 57% घटा) और अडानी ग्रीन जैसी दिग्गज कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।

  4. रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे विदेशी निवेशकों के बाहर निकलने की रफ्तार और तेज हो गई है।

इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा गिरावट

बाजार में सबसे ज्यादा मार अडानी ग्रुप के शेयरों पर पड़ी, जहाँ अडानी पोर्ट्स और अडानी एंटरप्राइजेज जैसे शेयर बुरी तरह टूटे। इसके अलावा इंडिगो, ज़ोमैटो, सिप्ला और बजाज फाइनेंस भी टॉप लूजर्स की सूची में रहे। बैंकिंग और आईटी सेक्टर में भी भारी बिकवाली का दबाव बना रहा।

विशेषज्ञों की राय

बाजार जानकारों का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितता और कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स के कारण फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे ऊंचे वैल्युएशन वाले शेयरों से बचें और गिरावट के स्थिर होने का इंतजार करें।

खबर लिखे जाने तक बीएसई का मार्केट कैप गिरकर 452.52 लाख करोड़ रुपये पर आ चुका था, जो पिछले सत्र में 458.50 लाख करोड़ रुपये था।

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