I-PAC की बढ़ी मुश्किलें, 13.5 करोड़ के ‘भूतिया’ लोन का हुआ खुलासा

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i pac 22.01.2026

कोलकाता/रोहतक | राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने का मंत्र देने वाली देश की जानी-मानी कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (इण्डियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) एक बार फिर बड़े विवाद के घेरे में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, I-PAC ने एक ऐसी कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का लोन लेने का दावा किया है, जिसका आधिकारिक तौर पर कोई अस्तित्व ही नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

दस्तावेजों के अनुसार, I-PAC ने 17 दिसंबर 2021 को कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) को सूचित किया था कि उसने हरियाणा के रोहतक स्थित ‘Ramasetu Infrastructure India (P) Limited’ से 13.50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। कंपनी ने जून 2025 में यह भी दावा किया कि उसने इस कर्ज में से 1 करोड़ रुपये चुका दिए हैं। लेकिन जब जांच एजेंसियों ने रिकॉर्ड खंगाले, तो पता चला कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) के पास इस नाम की कोई भी फर्म रजिस्टर्ड ही नहीं है।

2018 में ही बंद हो चुकी थी मिलती-जुलती फर्म

जांच में सामने आया कि रोहतक के जिस पते (अशोक प्लाजा, दिल्ली रोड) का जिक्र किया गया था, वहां ‘Ramsetu Infrastructure India Private Limited’ (बिना ‘a’ के) नाम की एक कंपनी जरूर थी, लेकिन उसे 2018 में ही रिकॉर्ड से हटा (Strike Off) दिया गया था। सवाल यह उठ रहा है कि जो कंपनी 2018 में ही खत्म हो गई, उसने 2021 में I-PAC को करोड़ों का लोन कैसे दे दिया?

शेयरधारकों ने झाड़ा पल्ला

लोन देने वाली कथित फर्म के पूर्व शेयरधारकों ने इस लेन-देन से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है।

  • संदीप राणा (शेयरधारक): “हमने फर्म खोली थी लेकिन कोई काम न होने पर इसे बंद कर दिया। हमें किसी लोन की जानकारी नहीं है।”

  • विजेंद्र (शेयरधारक): “जमीन के सौदों के लिए कंपनी बनी थी, काम नहीं चला तो बंद कर दी।”

  • विक्रम मुंजाल (वकील व शेयरधारक): इन्होंने भी कंपनी के सालों पहले बंद होने की पुष्टि की है।

ED की रडार पर I-PAC

कोलकाता में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए काम करने वाली I-PAC पर ईडी की छापेमारी और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह शेल कंपनियों (Shell Companies) के जरिए धन के अवैध लेन-देन का मामला है।

I-PAC: एक नज़र में

  • स्थापना: 13 अप्रैल 2015 (पटना)।

  • मुख्य कार्यालय: कोलकाता (फरवरी 2022 से)।

  • निदेशक व शेयरधारक: प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंडेल।

  • विवाद: अस्तित्वहीन कंपनी से 13.5 करोड़ रुपये का संदिग्ध लोन लेना।

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