‘इस्लामी नाटो’ के जवाब में भारत-यूएई-इजरायल का नया सुरक्षा चक्र
नई दिल्ली | दुनिया की भू-राजनीति में एक अभूतपूर्व बदलाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये मिलकर एक ‘इस्लामी नाटो’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भारत ने यूएई और इजरायल के साथ मिलकर अपना एक मजबूत रणनीतिक सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है। अमेरिकी शक्ति के वैश्विक स्तर पर सिमटने के बीच यह नए गठजोड़ आने वाले समय में दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की दिशा तय करेंगे।
पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये की ‘त्रिकोणीय धुरी’
हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक बड़े सैन्य समझौते ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस समझौते के तहत ‘सामूहिक रक्षा’ (Collective Defense) का प्रावधान है, जिसका अर्थ है कि एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा।
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रणनीतिक लाभ: इस गठबंधन में सऊदी अरब के पास आर्थिक शक्ति है, पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता और अनुभवी सेना है, जबकि तुर्किये अपनी उन्नत रक्षा तकनीक और ड्रोन शक्ति से इस गुट को आधुनिक सैन्य बल प्रदान कर रहा है।
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उद्देश्य: तुर्किये लंबे समय से इस्लामी जगत के नेतृत्व की महत्वाकांक्षा रखता है, और इस गठबंधन के जरिए वह अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
भारत का पलटवार: रणनीतिक रक्षा साझेदारी
‘इस्लामी नाटो’ की आहट के बीच भारत ने भी अपनी बिसात बिछा दी है। 19 जनवरी को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब यूएई और इजरायल के साथ मिलकर एक नया त्रिपक्षीय गठबंधन बना रहा है। यह गठबंधन न केवल पाकिस्तान और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकेगा, बल्कि अरब की खाड़ी से लेकर भूमध्य सागर तक भारत की रणनीतिक पहुंच को मजबूत करेगा।
पश्चिमी प्रभाव में कमी और नए गुटों का उदय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का फोकस ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) पर होने के कारण अमेरिका ने अपनी अंतरराष्ट्रीय सैन्य भूमिका को सीमित करना शुरू कर दिया है। इसी ‘सुरक्षा शून्यता’ (Security Vacuum) को भरने के लिए क्षेत्रीय शक्तियां अपने स्वतंत्र गुट बना रही हैं। भारत का यूएई और इजरायल के साथ जाना एक बड़ा कूटनीतिक दांव माना जा रहा है, जो भूमध्य सागर में ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों के हितों के साथ भी मेल खाता है।
प्रमुख रक्षा बिंदु (At a Glance):
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इस्लामी नाटो: पाकिस्तान की परमाणु शक्ति + सऊदी का पैसा + तुर्किये की टेक्नोलॉजी।
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भारत का सुरक्षा कवच: इजरायली तकनीक + यूएई का रणनीतिक स्थान + भारत की सैन्य और आर्थिक ताकत।
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अगली चुनौती: हिंद महासागर और मध्य पूर्व के समुद्री व्यापार मार्ग पर नियंत्रण की होड़।
