प्रयागराज माघ मेला: देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील बनीं संत

0
transgender

प्रयागराज। तीर्थराज प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान किन्नर समाज ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति का व्यापक विस्तार किया है। शुक्रवार को संगम की पावन रेती पर ‘किन्नर अखाड़ा’ और ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ दोनों ने ही अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए नए महामंडलेश्वरों, श्रीमहंतों और महंतों का पट्टाभिषेक किया। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता देश की पहली किन्नर वकील का सन्यास मार्ग पर कदम रखना रहा।

1. किन्नर अखाड़ा: डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने सौंपी नई जिम्मेदारियां

आचार्य महामंडलेश्वर प्रो. (डॉ.) स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में अखाड़े का विस्तार करते हुए उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लिए नए पदाधिकारी नियुक्त किए गए।

  • यूपी की कमान: महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि (छोटी मां) को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष और कन्केश्वरीनंद गिरि (किरन बाबा) को सचिव बनाया गया है।

  • पट्टाभिषेक: अखाड़े ने 7 नए महामंडलेश्वर, 6 श्रीमहंत, 11 महंत और 21 कंठी चेलों को विधि-विधान से नियुक्त किया।

  • प्रमुख नियुक्तियां: इसमें प्रतापगढ़ से पारोनंद गिरि, महाराष्ट्र से नेहानंद गिरि, ओडिशा से देवांशी नंद गिरि और झारखंड से अमरजीत नंद गिरि को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई।

पट्टाभिषेक से पूर्व सभी संतों ने त्रिवेणी संगम पर पिंडदान और विर्जादान जैसे धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए।

2. सनातनी किन्नर अखाड़ा: पहली किन्नर वकील बनीं संत

सनातनी किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर यशोदा नंद गिरी की मौजूदगी में 11 संतों का पट्टाभिषेक हुआ।

  • ऐतिहासिक पल: देश की पहली किन्नर वकील अभिरूपा रंजीत ने कानून की दुनिया के बाद अब धर्म का मार्ग चुना है। उन्हें संत के पद पर आसीन किया गया।

  • कठिन परंपराएं: पट्टाभिषेक के दौरान पारंपरिक 13 अखाड़ों की तरह ही नियमों का पालन किया गया। संतों ने स्वयं का पिंडदान किया, पांच गुरुओं से दीक्षा ली, चोटी काटी और भस्म धारण कर सांसारिक मोह त्यागने का संकल्प लिया।

  • भविष्य की योजना: आचार्य कौशल्यानंद गिरि ने बताया कि आगामी समय में कश्मीरी पंडितों और दक्षिण भारतीय समुदाय को भी अखाड़े से जोड़कर सनातन धर्म को और अधिक समावेशी बनाया जाएगा।

विभाजन के बाद पहला बड़ा आयोजन

ज्ञात हो कि 2016 में उज्जैन कुंभ से गठित हुए किन्नर अखाड़े में पिछले साल (महाकुंभ 2025) के बाद विभाजन हो गया था, जिसके बाद ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ अस्तित्व में आया। इस माघ मेले में दोनों ही अखाड़ों ने भारी संख्या में नए संतों को जोड़कर समाज में अपनी पैठ मजबूत करने का संदेश दिया है। किन्नर अखाड़े का यह विस्तार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग को मुख्यधारा के आध्यात्मिक नेतृत्व में स्थान देने की एक बड़ी कोशिश है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *