मकर संक्रांति: खान-पान और जीवनशैली में बदलाव कर साल भर रहें निरोगी
नई दिल्ली: उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में इन दिनों कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं का सितम जारी है। वातावरण में आए इस रूखेपन के कारण सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसम उन लोगों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो पहले से ही किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), दिल्ली के निदेशक डॉ. प्रदीप प्रजापति के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि अपनी सेहत को बेहतर बनाने का एक बेहतरीन अवसर है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही वातावरण में ऊष्मा और प्रकाश बढ़ता है, जो शरीर के ‘वात दोष’ को संतुलित करने में सहायक होता है।
संक्रांति और सेहत का विज्ञान
डॉ. प्रजापति बताते हैं कि इस समय सूर्य की गति बदलने से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पारंपरिक रूप से इस दौरान तिल, गुड़, घी और खिचड़ी के सेवन का विशेष महत्व है। ये आहार न केवल शरीर को ऊर्जा देते हैं, बल्कि वात शमन (वायु दोष को कम करना) में भी मदद करते हैं। यह समय ‘शिशिर ऋतु’ का मध्य काल है, जिसमें शरीर की ‘अग्नि’ (पाचन शक्ति) प्रबल होती है। यदि इस समय सही पोषण लिया जाए, तो शरीर पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण करता है, जिससे साल भर के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) मजबूत होती है।
ऋतुचर्या: बदलें अपनी जीवनशैली
आयुर्वेद में मौसम के अनुसार जीवनशैली ढालने को ‘ऋतुचर्या’ कहा गया है। संतुलित दिनचर्या अपनाकर सर्दी-खांसी और जोड़ों के दर्द (संधिवात) जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
क्या खाएं और क्या नहीं?
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अन्न: गेहूं, चावल, जौ और बाजरा का सेवन करें।
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स्निग्ध आहार: देसी घी और तिल के तेल का संतुलित प्रयोग।
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प्रोटीन: दूध, दुग्ध उत्पाद और दालें।
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मसाले: अदरक, लहसुन, काली मिर्च, पीपली, हींग और अजवाइन का प्रयोग बढ़ाएं।
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परहेज: ठंडा, बासी, रूखा भोजन और शीतल पेय पदार्थों से बचें। भूख को न दबाएं और अत्यधिक उपवास से बचें।
बीपी और शुगर के मरीजों के लिए विशेष सावधानी
सर्दियों में वात बढ़ने से रक्तचाप (BP) बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। डॉ. प्रजापति ने कुछ विशेष सुझाव दिए हैं:
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दवाइयां: बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयों में कोई बदलाव न करें।
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सावधानी: अत्यधिक ठंड में सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें।
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मालिश: यदि बीपी नियंत्रित है, तभी तिल के तेल से मालिश करें।
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तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान का अभ्यास करें और पर्याप्त नींद लें।
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आहार: शुगर के मरीज तिल-गुड़ की मिठाई से परहेज करें और नमक का सेवन नियंत्रित रखें।
स्वस्थ रहने के लिए ‘गोल्डन रूल्स’
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ब्रह्ममुहूर्त में उठें: सुबह जल्दी उठकर गुनगुने पानी का सेवन करें और सूर्य दर्शन करें।
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अभ्यंग (मालिश): प्रतिदिन तिल के तेल से शरीर की मालिश करें और गुनगुने पानी से स्नान करें।
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व्यायाम: अपनी शक्ति अनुसार व्यायाम करें। सूर्य नमस्कार, भस्त्रिका और कपालभाति जैसे योगासन अत्यंत लाभकारी हैं।
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सुरक्षा: सिर, कान, नासिका और पैरों को ढक कर रखें। कपड़ों को परतों (layers) में पहनें।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के अनुकूल अपनी आदतों और व्यवहार में बदलाव करना ही दीर्घायु और सेहतमंद बने रहने का राज है। यदि बुखार या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
