सोना-चांदी के बाद अब ‘लाल सोना’ चमका: कॉपर ने एक साल में दिया 60% का रिटर्न
नई दिल्ली: शेयर बाजार की मौजूदा सुस्ती के बीच निवेशकों का रुझान अब सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाली कमोडिटीज की ओर बढ़ रहा है। सोना और चांदी की रिकॉर्ड तेजी के बाद अब कॉपर (तांबा) निवेशकों के लिए अगला बड़ा दांव बनकर उभरा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के चलते कॉपर की कीमतों ने वैश्विक और घरेलू स्तर पर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
ग्लोबल मार्केट में ऐतिहासिक स्तर पर कीमतें
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) और अमेरिकी एक्सचेंज COMEX पर कॉपर की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। 6 जनवरी 2026 को COMEX पर कॉपर $6.069 प्रति पाउंड के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया, जो पिछले एक साल में करीब 60% की बढ़त दर्शाता है। मार्च 2022 के बाद यह कॉपर का सबसे ऊंचा स्तर है। भारतीय बाजार (MCX) में भी पिछले एक साल में कॉपर फ्यूचर्स ने करीब 36% का रिटर्न दिया है, जो कई दिग्गज शेयरों के मुकाबले कहीं अधिक है।
क्यों बढ़ रही है तांबे की चमक?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कॉपर की इस तेजी के पीछे केवल निवेश ही नहीं, बल्कि वैश्विक औद्योगिक बदलाव भी शामिल हैं:
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इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV): ईवी सेक्टर में कॉपर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इस सेक्टर के विस्तार ने मांग को कई गुना बढ़ा दिया है।
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डेटा सेंटर और एआई: डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भारी मात्रा में कॉपर की आवश्यकता होती है।
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सप्लाई चैन में कमी: मांग के मुकाबले कॉपर की फिजिकल सप्लाई सीमित है। खदानों से उत्पादन धीमा होने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
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डॉलर की कमजोरी: वैश्विक स्तर पर डॉलर के कमजोर होने और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीदों ने भी कमोडिटी बाजार को मजबूती दी है।
क्या रिटेल निवेशक लगा सकते हैं दांव?
कॉपर में बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए इसमें सीधे निवेश की राह आसान नहीं है।
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ETF और म्यूचुअल फंड का अभाव: भारत में फिलहाल गोल्ड या सिल्वर की तरह कॉपर का कोई ईटीएफ (ETF) या म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं है।
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फिजिकल निवेश की कमी: सोने-चांदी की तरह तांबे के सिक्कों या बार में निवेश का कोई संगठित प्लेटफॉर्म मौजूद नहीं है।
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फ्यूचर्स ट्रेडिंग का जोखिम: फिलहाल रिटेल निवेशकों के पास केवल MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग का विकल्प है। लेकिन यहां एक कॉन्ट्रैक्ट 2.5 टन का होता है, जिससे जोखिम काफी बढ़ जाता है।
एक नजर: कॉपर की रिकॉर्ड रैली (जनवरी 2026)
| मार्केट | वर्तमान स्थिति/रिकॉर्ड | पिछले 1 साल की बढ़त |
| COMEX (USA) | $6.069 प्रति पाउंड (6 Jan) | ~60% |
| MCX (India) | फ्यूचर्स में मजबूत तेजी | ~36% |
| प्रमुख कारण | EV, डेटा सेंटर, सीमित सप्लाई | मांग में भारी उछाल |
विशेषज्ञ की राय: VT Markets के रॉस मैक्सवेल के अनुसार, “कॉपर की तेजी यह दर्शाती है कि दुनिया में इलेक्ट्रिफिकेशन की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि फिजिकल स्टॉक कम है। यह कॉपर को लंबी अवधि के लिए एक आकर्षक एसेट बनाता है।”
डिस्क्लेमर: यहाँ दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
