आईएएस अनुराग तिवारी: जन्मदिन बना बरसी, क्या 2000 करोड़ का ‘राशन घोटाला’ बना जान का दुश्मन?
लखनऊ/बहराइच। 17 मई 2017 की वह सुबह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के प्रशासनिक गलियारों में सन्नाटा लेकर आई थी। बहराइच का एक साधारण परिवार अपने होनहार बेटे, 2007 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी का 36वां जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन सुबह 8 बजे आए एक फोन ने खुशियों को मातम में बदल दिया। लखनऊ के हजरतगंज स्थित वीआईपी गेस्ट हाउस के बाहर सड़क किनारे अनुराग का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।
बीदर के ‘जननायक’ से घोटाले के ‘काल’ तक का सफर
अनुराग तिवारी केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि जनता के बीच एक नायक के रूप में पहचाने जाते थे। साल 2006 में यूपीएससी में 24वीं रैंक हासिल करने वाले अनुराग ने कर्नाटक कैडर में अपनी सेवा के दौरान अमिट छाप छोड़ी। बीदर में तालाबों के पुनरुद्धार और जैविक खेती को बढ़ावा देने के उनके कार्यों के कारण जब उनका तबादला हुआ, तो लोग सड़कों पर उतर आए थे।
अपनी मृत्यु के समय वे बेंगलुरु में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के कमिश्नर थे। उनके परिवार और सूत्रों का दावा है कि वे फर्जी राशन कार्डों के जरिए हो रहे 1,000 से 2,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले की परतें खोल रहे थे। आरोप है कि एनआईसी (NIC) के सॉफ्टवेयर की खामी का फायदा उठाकर एक ही आधार नंबर से कई राशन कार्ड लिंक कर गरीबों का अनाज लूटा जा रहा था।
रहस्यमयी मौत: सीसीटीवी और वो आखिरी रात
अनुराग की मौत से जुड़ी कड़ियां आज भी उलझी हुई हैं। 16 मई की रात उन्हें एक रेस्टोरेंट के सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था। रात 11 बजे वे गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 19 में लौटे, जहाँ वे अपने बैचमेट प्रभु नारायण सिंह के साथ ठहरे थे। 17 मई की सुबह उनका रूममेट बैडमिंटन खेलने निकल गया, लेकिन कुछ ही देर बाद अनुराग का शव सड़क पर मिला। वे अपने सोने के कपड़ों में थे और उनकी ठोड़ी पर मामूली चोट के अलावा शरीर पर कोई बड़ा जख्म नहीं था।
जांच पर सवाल: ‘एस्फिक्सिया’ या गहरी साजिश?
शुरुआती पुलिस जांच ने इसे दिल का दौरा या स्वाभाविक मौत बताया, जिसे उनके परिवार ने सिरे से खारिज कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण एस्फिक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) बताया गया, लेकिन यह कमी कैसे हुई, इसका जवाब आज तक नहीं मिला।
“मेरा भाई पावर योगा करता था और पूरी तरह स्वस्थ था। उसे मारा गया है ताकि घोटाले की जांच दब सके।” > — मयंक तिवारी (अनुराग के भाई)
CBI की क्लोजर रिपोर्ट और कोर्ट की फटकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। लंबी जांच के बाद सीबीआई ने इसे “दुर्घटना में गिरने के कारण हुई मौत” करार देते हुए क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। सीबीआई ने घोटाले के दावों को भी आधारहीन बताया।
हालांकि, सितंबर 2022 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने इस क्लोजर रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पेश किए गए सबूत अपर्याप्त हैं। कोर्ट के इस फैसले ने परिवार की न्याय की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया है। मामला अभी भी लंबित है, और सवाल आज भी वही है— क्या एक ईमानदार अधिकारी की कीमत एक बड़े घोटाले के पर्दाफाश की कोशिश थी?
