ईडी की छापेमारी के बीच सीएम ममता बनर्जी पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप

ed mamta

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम और राज्य सरकार के बीच गुरुवार को बड़ा टकराव देखने को मिला। ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं दखल देकर जांच से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों और दस्तावेजों को जबरन हटवा दिया।

मुख्यमंत्री पर जांच बाधित करने का आरोप

ईडी की ‘हेडक्वार्टर यूनिट’ गुरुवार को कोयला तस्करी मामले में बंगाल के 6 और दिल्ली के 4 ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कोलकाता में छापेमारी की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी, तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने भारी पुलिस बल और अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं।

ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री न केवल प्रतीक जैन के आवासीय परिसर में दाखिल हुईं, बल्कि वहां से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज भी हटवा दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला आई-पैक (I-PAC) के दफ्तर की ओर बढ़ा, जहां कथित तौर पर राज्य पुलिस की मदद से जांच से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस पर कब्जा कर लिया गया।

भाजपा का तीखा प्रहार: ‘सत्ता का सबसे बुरा दुरुपयोग’

इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। बीजेपी के नेशनल आईटी इंचार्ज अमित मालवीय ने ईडी के बयान को साझा करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया। मालवीय ने कहा, “यह सत्ता का सबसे बुरा दुरुपयोग है। एक मौजूदा मुख्यमंत्री कानून का साथ देने के बजाय अपराधियों और तस्करों को बचाने के लिए खुद जांच में बाधा डाल रही हैं।” उन्होंने इसे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) का खुला उल्लंघन करार दिया।

क्या है पूरा मामला?

ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई अनूप माझी (लाला) की अगुवाई वाले कोयला तस्कर सिंडिकेट के खिलाफ है। यह सिंडिकेट पश्चिम बंगाल के ईसीएल (ECL) लीजहोल्ड इलाकों से अवैध रूप से कोयले का खनन और चोरी करने में संलिप्त है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि छापेमारी पूरी तरह से कानूनी पहलुओं के तहत की गई थी और किसी भी राजनीतिक दफ्तर को सर्च नहीं किया गया था।

मुख्य बिंदु:

  • छापेमारी के स्थान: पश्चिम बंगाल (6) और दिल्ली (4) के कुल 10 ठिकाने।

  • आरोप: मुख्यमंत्री ने पुलिस के साथ मिलकर सबूतों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को कब्जे में लिया।

  • मामला: कोयला तस्करी और अवैध खनन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग।