यूरिक एसिड बढ़ा है तो घबराएं नहीं, दवा से पहले लाइफस्टाइल सुधारना है असली इलाज

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नई दिल्ली: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खानपान के कारण यूरिक एसिड की समस्या आम हो गई है। खून की जांच में यूरिक एसिड थोड़ा बढ़ा हुआ देखते ही लोग अक्सर घबराकर दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हर मामले में दवा की जरूरत नहीं होती।

यदि किसी व्यक्ति का यूरिक एसिड लेवल 6 से 8 के बीच है और शरीर में कोई लक्षण नहीं हैं, तो दवा लेने की हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए। करीब 90 फीसदी मामलों में सिर्फ जीवनशैली और खानपान में बदलाव करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

दवा कब जरूरी? डॉक्टरों के अनुसार, दवा तब शुरू करनी चाहिए जब यूरिक एसिड का स्तर 8.0 से ऊपर चला जाए। इसके अलावा, अगर जोड़ों में तेज दर्द, सूजन, गाउट अटैक या किडनी से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हों, तो चिकित्सकीय सलाह पर दवा लेना अनिवार्य है।

खानपान में करें ये बदलाव: यूरिक एसिड बढ़ने की सबसे बड़ी वजह हाई प्यूरिन वाली चीजें हैं। नॉनवेज (खासकर रेड मीट), शराब, और ज्यादा मीठी चीजों से परहेज करना चाहिए। इसके विपरीत, विटामिन-सी से भरपूर फल (संतरा, चेरी, टमाटर) और लो-फैट दूध का सेवन फायदेमंद साबित होता है।

पानी और व्यायाम है मंत्र: शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। गर्मियों में 10 गिलास और सर्दियों में 6-8 गिलास पानी पीने से यूरिक एसिड पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है। साथ ही, रोजाना 45 मिनट की ब्रिस्क वॉक (तेज चलना) मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर इसे कंट्रोल करती है।

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