रॉयल सहकारी आवास समिति प्रकरण में कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे दीपक सिंह?
ग्रेटर नोएडा। रॉयल सहकारी आवास समिति लिमिटेड (पंजीकरण संख्या 2589), ग्रेटर नोएडा में प्रबंधन समिति और पांच वार्डों में चुनाव के बजाय नामांकन किए जाने से जुड़े मामले में अब उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के स्तर पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर के निर्देश पर हुई जांच में समिति की कार्यप्रणाली में नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। जांच के बाद संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की गई थी।
यह मामला IGRS शिकायत संख्या 20014126002077 से संबंधित है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में तैयार जांच आख्या पत्रांक 79/IGRS/2026-27, दिनांक 25 अप्रैल 2026 में समिति के प्रबंधन और निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया।
इसके बाद सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता, गौतमबुद्ध नगर ने पत्र संख्या 328, दिनांक 8 जुलाई 2026 के माध्यम से अपर आवास आयुक्त एवं अपर निबंधक (आवास), उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ को मामले में आवश्यक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की।
जांच में क्या सामने आया?
उपलब्ध जांच रिपोर्ट के अनुसार शिकायत की जांच के लिए अपर जिला सहकारी अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर समिति की प्रबंध कमेटी की कुछ कार्यवाहियों को नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि समिति के सचिव द्वारा निर्वाचन संबंधी कार्रवाई नहीं की जा रही थी। साथ ही अध्यक्ष और सचिव की ओर से गंभीर अनियमितताएं किए जाने की बात जांच में सामने आने का उल्लेख है।
जांच आख्या में संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने तथा धारा 103 के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की गई है।
आठ जुलाई के पत्र में परिषद से कार्रवाई की अपेक्षा
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक की ओर से 8 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र में कहा गया कि जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर के निर्देश पर प्रकरण को स्पेशल सेल शिकायत के रूप में मार्क किया गया था।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि रॉयल सहकारी आवास समिति लिमिटेड शहरी क्षेत्र की आवास समिति है और उसके नियंत्रण, नियमन एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के कार्यालय से संबंधित है।
इसी आधार पर परिषद के अपर आवास आयुक्त एवं अपर निबंधक (आवास) से अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर को कार्रवाई से अवगत कराने की अपेक्षा की गई।

अब सवाल—आवास एवं विकास परिषद ने क्या किया?
इसी मुद्दे को लेकर 7 अगस्त 2026 को RTI (UPHDB/R/2026/60704) आवेदन दाखिल किया गया है। आवेदन में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद से पूछा गया है कि 25 अप्रैल 2026 की जांच आख्या पर अब तक अपर आवास आयुक्त द्वारा क्या-क्या कार्रवाई की गई।
RTI में संबंधित मामले में नियुक्त अधिकारी का नाम, पदनाम और संपर्क विवरण भी मांगा गया है। इसके अलावा यदि अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो उसका स्पष्ट एवं लिखित कारण बताने की मांग की गई है।
आवेदक ने मामले से जुड़ी नोटशीट, आंतरिक पत्राचार, फाइल मूवमेंट और अनुमोदनों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी हैं। साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि संस्तुत कार्रवाई के क्रम में आवास आयुक्त या अपर आवास आयुक्त ने जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर को कार्रवाई से अवगत कराने के लिए कोई पत्र भेजा है या नहीं; यदि भेजा है तो उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
समिति के आवास अधिकारी सौरभ द्विवेदी, सहकारी अधिकारी (आवास), और दीपक सिंह, अपर आवास आयुक्त, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा उक्त जांच रिपोर्ट (79/IGRS/2026-27, दिनांक 25 अप्रैल 2026 ) को संज्ञानित एवं कार्यवाही न करने से उनका वर्तमान मैनेजमेंट के साथ नेक्सस (NEXUS) और को दिया गया संरक्षण उजागर होता हुआ नजर आता है। विभाग द्वारा उक्त जांच रिपोर्ट को दबाने की कोशिश भी की जा रही है।
अध्यक्ष रूपक रोड, उपाध्यक्ष योगेंद्र रावत चौरसिया एवं प्रबंध कमेटी द्वारा आदेशित जांच (पत्रांक 3081 दिनांक 07.07.2025 ) में सहयोग न करने के विरुद्ध भी दीपक सिंह, अपर आवास आयुक्त द्वारा कोई कार्रवाई न करते हुए सिर्फ सचिव कमलेश कुमार श्रीवास्तव के विरुद्ध कार्रवाई की खानापूर्ति की गई है। तत्कालीन सचिव अंकित आलोक श्रीवास्तव द्वारा तत्काल प्रभाव से 4 अगस्त 2025 को त्यागपत्र देने के बाद जांच में सहयोग करने की पूरी जिम्मेदारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रबंध कमेटी की थी। आवास अधिकारी, सौरभ द्विवेदी और दीपक सिंह, अपर आवास आयुक्त द्वारा 4 अगस्त 2025 को सचिव पद से त्यागपत्र को जानबूझकर संज्ञानित न करते हुए, तथ्यों से इतर, विभागीय पत्र (पत्रांक 2231 दिनांक 03.07.2026) में दिखाया गया कि अंकित आलोक श्रीवास्तव दिनांक 24.09.2025 तक सचिव पद पर कार्यरत थे ताकि जांच में सहयोग करने की जिम्मेदारी से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रबंध कमेटी बचे रहते हुए पद पर आसीन रहे। तथा उक्त संबंध में दिनांक 24.05.2026 को, आवास आयुक्त एवं अपर आवास आयुक्त को, अंकित आलोक श्रीवास्तव द्वारा प्रेषित ईमेल को भी संज्ञानित न करते हुए मौजूदा प्रबंधन को संरक्षण दिया गया।
RTI के जरिए मांगा गया कार्रवाई का रिकॉर्ड
मामले में 7 अगस्त 2026 को RTI आवेदन संख्या UPHDB/R/2026/60704 दाखिल किया गया। इसमें 25 अप्रैल 2026 की जांच आख्या के आधार पर अपर आवास आयुक्त के स्तर पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।
RTI में संबंधित प्रकरण में नियुक्त अधिकारी का नाम, पदनाम और संपर्क विवरण भी मांगा गया है। साथ ही यह पूछा गया है कि यदि जांच रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो उसके कारण क्या हैं।
आवेदक ने मामले से संबंधित नोटशीट, आंतरिक पत्राचार, फाइल मूवमेंट और अनुमोदनों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी हैं।
इसके अलावा यह जानकारी भी मांगी गई है कि जांच में संस्तुत कार्रवाई के संबंध में आवास आयुक्त अथवा अपर आवास आयुक्त ने जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर को कोई पत्र भेजा या नहीं। यदि पत्र भेजा गया है तो उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

पुराने जांच आदेश और सचिव के इस्तीफे को लेकर भी सवाल
मामले में पत्रांक 3081, दिनांक 7 जुलाई 2025 के माध्यम से आदेशित जांच में सहयोग नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच में सहयोग नहीं करने के मामले में अपर आवास आयुक्त की ओर से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रबंध कमेटी के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और केवल तत्कालीन सचिव कमलेश कुमार श्रीवास्तव के विरुद्ध कार्रवाई तक मामला सीमित रहा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, तत्कालीन सचिव अंकित आलोक श्रीवास्तव ने 4 अगस्त 2025 को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका दावा है कि इसके बाद जांच में सहयोग करने की जिम्मेदारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रबंध कमेटी की थी।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि 4 अगस्त 2025 को दिए गए इस्तीफे को विभागीय स्तर पर उचित रूप से संज्ञान में नहीं लिया गया और पत्रांक 2231, दिनांक 3 जुलाई 2026 में अंकित आलोक श्रीवास्तव को 24 सितंबर 2025 तक सचिव पद पर कार्यरत बताया गया।
इस संबंध में 24 मई 2026 को अंकित आलोक श्रीवास्तव द्वारा आवास आयुक्त एवं अपर आवास आयुक्त को भेजे गए ईमेल का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस ईमेल और इस्तीफे को पर्याप्त रूप से संज्ञान में नहीं लिया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और RTI के जवाब से होना बाकी है।

‘संरक्षण’ और ‘नेक्सस’ के आरोपों की भी होगी जांच
शिकायतकर्ता की ओर से आवास अधिकारी सौरभ द्विवेदी और अपर आवास आयुक्त दीपक सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 25 अप्रैल 2026 की जांच आख्या पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और इससे मौजूदा प्रबंधन को संरक्षण मिलने की स्थिति पैदा हुई।
शिकायतकर्ता ने इसे मौजूदा प्रबंधन और अधिकारियों के बीच कथित ‘नेक्सस’ से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।
हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इस आरोप को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा सकता है। अधिकारियों और संबंधित प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब RTI के जवाब का इंतजार
पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 25 अप्रैल 2026 की जांच आख्या और 8 जुलाई 2026 के कार्रवाई संबंधी पत्र के बाद उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के स्तर पर वास्तव में क्या कार्रवाई की गई?
क्या जांच रिपोर्ट पर कोई विभागीय निर्णय लिया गया? क्या किसी अधिकारी को जांच या कार्रवाई के लिए नामित किया गया? क्या संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही शुरू हुई? और क्या जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर को कार्रवाई से अवगत कराया गया?
