रॉयल सहकारी आवास समिति में गंभीर अनियमितताओं का मामला, कड़ी कार्रवाई की संस्तुति
ग्रेटर नोएडा। रॉयल सहकारी आवास समिति लिमिटेड, ग्रेटर नोएडा में प्रबंधन समिति के कामकाज और वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। गौतमबुद्ध नगर के सहकारिता विभाग से जुड़े दस्तावेजों में समिति के संचालन में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए तत्काल कार्रवाई की संस्तुति की गई है। मामला IGRS शिकायत संख्या 20014126002077 से संबंधित है।
जांच में सामने आए कई गंभीर बिंदु
11 मई 2026 को तैयार पत्र में 25 अप्रैल 2026 की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि समिति के संचालन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि प्रबंध समिति की संरचना में 5 नामित और 4 निर्वाचित पद रिक्त हो गए हैं और संबंधित वार्डों में चुनाव कराए जाने की आवश्यकता है। साथ ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव की कार्यशैली को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
दस्तावेज में समिति की बिना UDIN वाली अनऑडिटेड बैलेंस शीट में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए गहन जांच की जरूरत बताई गई है। जांच में उत्तर प्रदेश सहकारी आवास समिति अधिनियम, 1965 की धारा 103 के तहत कार्रवाई की बात भी कही गई है।




FD की रकम में अंतर पर उठे सवाल
दस्तावेज में समिति की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड में अलग-अलग वर्षों में FD की रकम इस प्रकार दर्ज है—
- 31 मार्च 2023: ₹2.07 करोड़
- धारा 66 की जांच रिपोर्ट, 24 अक्टूबर 2024: ₹2.26 करोड़
- वर्ष 2024-25 की अनऑडिटेड आय-व्यय/बैलेंस शीट: ₹2.06 करोड़
जांच संबंधी पत्र में इस अंतर को गंभीर वित्तीय मुद्दा बताते हुए तत्काल गहन जांच की आवश्यकता जताई गई है। साथ ही आरोप है कि आम सभा की अनुमति के बिना समिति की FD तोड़ी गई और करीब डेढ़ वर्ष बाद 18 जनवरी 2026 की आम सभा में इसे स्वीकार किया गया, लेकिन इससे जुड़े सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।
जमीन की NOC और ब्याज भुगतान भी जांच के घेरे में
शिकायत में तत्कालीन सह-सचिव परवीन कुमार पाल पर नियमों के विपरीत समिति को ब्याज का भुगतान किए बिना अपने जीजा के फ्लैट 31D की NOC हस्ताक्षरित करने तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को जारी करने का आरोप लगाया गया है। दस्तावेज में इससे समिति को लाखों रुपये के ब्याज की संभावित क्षति का उल्लेख करते हुए जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
सात बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग
जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों से कई स्तरों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इनमें कथित दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ FIR और दंडात्मक कार्रवाई, प्रबंध समिति की संरचना दुरुस्त कर निष्पक्ष चुनाव कराने, बैंक खातों से धन आहरण और नई FD कराने पर तत्काल रोक, मौजूदा प्रबंध समिति को भंग कर सक्षम प्रशासक नियुक्त करने तथा समिति के वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच शामिल है।
रिपोर्ट में पिछले छह वर्षों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की आवश्यकता भी बताई गई है। इसके अलावा 18 जनवरी 2026 की AGM में पारित प्रस्ताव के अनुपालन में समिति की दोनों शाखाओं—रॉयल टावर, सेक्टर-61, नोएडा और रॉयल अपार्टमेंट, सिग्मा-IV, ग्रेटर नोएडा—को अलग एवं स्वतंत्र समितियों के रूप में पंजीकृत कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई के लिए आवास आयुक्त, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को निर्देश देने की मांग की गई है।
जिलाधिकारी के आदेश के बाद सहकारिता विभाग सक्रिय
25 अप्रैल 2026 के पत्र में सहकारिता विभाग ने बताया कि IGRS पोर्टल पर प्राप्त शिकायत की जांच के लिए अपर जिला सहकारी अधिकारी (निर्वाचन प्रभारी) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार समिति की प्रबंध कमेटी की संरचना दूषित हो गई है, सचिव द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया नहीं कराई जा रही है और सचिव व अध्यक्ष के स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के तथ्य सामने आने की बात कही गई।
इसके बाद 8 जुलाई 2026 को सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता, गौतमबुद्धनगर ने अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (आवास), उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद, लखनऊ को पत्र भेजकर मामले में अपने स्तर से कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर को अवगत कराने का अनुरोध किया। पत्र में स्पष्ट किया गया कि रॉयल सहकारी आवास समिति लिमिटेड शहरी क्षेत्र की समिति है और उसका पंजीयन, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण संबंधित कार्यालय के अधीन है।
