केजरीवाल की ‘हुंकार’ और AAP के वो 10 योद्धा जो हिला सकते हैं बीजेपी का ‘अभेद्य किला’

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arvind kejriwal

अहमदाबाद: भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत गढ़ गुजरात में सियासी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने तीन दिवसीय दौरे के साथ ही मिशन 2027 का आगाज़ कर दिया है। महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के नतीजों के बाद गुजरात पहुंचे केजरीवाल ने दावा किया है कि 2027 में ‘आप’ बीजेपी को सत्ता से बाहर कर देगी।

अगले कुछ महीनों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव (महानगरपालिका चुनाव) को इस महामुकाबले का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है।

2022 की सफलता से बढ़ा उत्साह

गौरतलब है कि 5 साल पहले सूरत नगर निगम चुनाव से ‘आप’ ने गुजरात में एंट्री ली थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 14% वोट शेयर और 5 सीटों के साथ सबको चौंका दिया था। पिछले कई दशकों में गुजरात की राजनीति में किसी तीसरी पार्टी का यह सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन था।

‘आप’ की ‘टीम-10’: किसके कंधे पर है जिम्मेदारी?

अरविंद केजरीवाल ने 2027 की जीत का दावा तो कर दिया है, लेकिन चर्चा इस बात की है कि आखिर वे कौन से चेहरे हैं जिनके दम पर बीजेपी को चुनौती दी जाएगी। यहाँ ‘आप’ के उन शीर्ष 10 नेताओं का विश्लेषण है जो ज़मीन पर पार्टी को मज़बूत कर रहे हैं:

नेता का नाम भूमिका/शक्ति मुख्य प्रभाव क्षेत्र
गोपाल इटालिया युवा चेहरा, प्रखर वक्ता विसावदर / पाटीदार समाज
चैतर वसावा आदिवासी बेल्ट की ‘आंधी’ डेडियापाड़ा / आदिवासी क्षेत्र
इसुदान गढ़वी प्रदेश अध्यक्ष, किसानों की आवाज़ किसान / सौराष्ट्र
राजू करपड़ा किसान सेल प्रमुख, नई सनसनी कृषि मंडियां
मनोज सोरठिया संगठन का मज़बूत ढांचा संगठन विस्तार
ब्रिजराज सोलंकी सोशल मीडिया स्टार (100M+ रील्स) युवा / भावनगर
रेशमा पटेल फायरब्रांड महिला नेता महिला मोर्चा / पाटीदार
प्रवीण राम युवाओं के बीच लोकप्रिय गांधीनगर / युवा आंदोलन
हेमंत खवा विधायक और जनसंपर्क जामजोधपुर / सौराष्ट्र
डॉ. करन बारोट मुख्य प्रवक्ता (डेंटिस्ट) मीडिया और पक्ष प्रस्तुति

किन चेहरों में है कितना दम?

1. गोपाल इटालिया और चैतर वसावा: सबसे लोकप्रिय जोड़ी

विसावदर से जीत के बाद गोपाल इटालिया की स्वीकार्यता पाटीदार संस्थाओं में बढ़ी है। वहीं, आदिवासी बेल्ट में चैतर वसावा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। उनकी लोकप्रियता के आगे बीजेपी और कांग्रेस दोनों के समीकरण बिगड़ते दिख रहे हैं।

2. इसुदान गढ़वी: किसानों का भरोसा

पत्रकारिता छोड़ राजनीति में आए इसुदान गढ़वी ने खुद को ‘सर्वसमाज’ के नेता के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई है। 2022 में सीएम फेस रहे गढ़वी की पकड़ ग्रामीण इलाकों में मजबूत है।

3. राजू करपड़ा और ब्रिजराज सोलंकी: उभरते सितारे

किसान नेता राजू करपड़ा ने मंडियों में किसानों के साथ हो रहे अन्याय को मुद्दा बनाकर अपनी पहचान बनाई है। दूसरी ओर, ब्रिजराज सोलंकी एक सोशल मीडिया सनसनी बनकर उभरे हैं। लंदन से एमबीए कर चुके सोलंकी की पुलिस से भिड़ने वाली एक इंस्टाग्राम रील 100 मिलियन से अधिक बार देखी जा चुकी है, जिसने युवाओं को पार्टी की ओर आकर्षित किया है।

4. रेशमा पटेल: बीजेपी पर तीखा प्रहार

पाटीदार आंदोलन से उभरीं रेशमा पटेल ने हाल ही में “कमल की खेती” वाला बयान देकर खूब चर्चा बटोरी। वे महिला मोर्चे का नेतृत्व करते हुए बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

क्या होगा परिणाम?

गुजरात में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। जहाँ बीजेपी अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई ज़मीन तलाश रही है। इन सबके बीच अरविंद केजरीवाल की ‘नई टीम’ और बदली हुई रणनीति क्या 2027 में इतिहास रच पाएगी? यह आने वाला वक्त बताएगा।

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