दिलीप कुमार से ए.आर. रहमान बनने की कहानी: 23 की उम्र में क्यों बदला धर्म और नाम?
नई दिल्ली। भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाले और कला जगत के सर्वोच्च सम्मान ‘ऑस्कर’ से नवाजे गए संगीतकार ए.आर. रहमान (A.R. Rahman) की जिंदगी का एक पहलू बेहद दिलचस्प है। बहुत कम लोग जानते हैं कि जन्म से हिंदू रहे रहमान का असली नाम दिलीप कुमार था। महज 23 साल की उम्र में उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम बदल लिया। इस बड़े बदलाव के पीछे की वजह एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव और उनके पिता की बीमारी से जुड़ा किस्सा है।
सूफी संत और धर्म परिवर्तन की वजह
एक टॉक शो के दौरान ए.आर. रहमान ने अपने धर्म परिवर्तन के कारण का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि जब उनके पिता कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, तब उनके अंतिम दिनों में एक सूफी संत ने उनका इलाज किया था। पिता के निधन के करीब 7-8 साल बाद जब रहमान और उनका परिवार उस सूफी संत से दोबारा मिला, तो उन्हें एक अलग आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर असीम शांति का अनुभव हुआ। यही वह पल था जब उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाने का फैसला किया। रहमान का कहना है कि इस दूसरे आध्यात्मिक रास्ते ने उन्हें वह शांति दी जिसकी उन्हें तलाश थी।
‘दिलीप कुमार’ नाम कभी पसंद नहीं आया
नसरीन मुन्नी कबीर की किताब ‘ए.आर. रहमान: द स्पिरिट ऑफ म्यूजिक’ में संगीतकार ने स्वीकार किया है कि उन्हें अपना जन्म का नाम ‘दिलीप कुमार’ कभी पसंद नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका महान अभिनेता दिलीप कुमार से कोई लेना-देना नहीं है, बस उन्हें लगता था कि यह नाम उनकी अपनी छवि से मेल नहीं खाता। धर्म बदलने के फैसले पर उन्होंने कहा कि संगीतकार होने के नाते उन्हें सामाजिक आजादी थी, इसलिए आसपास के लोगों को इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
कैसे पड़ा ‘अल्लाह रक्खा रहमान’ नाम?
नाम बदलने की कहानी भी उतनी ही रोचक है। रहमान का पूरा नाम ‘अल्लाह रक्खा रहमान’ है, जो दो अलग-अलग स्रोतों से आया है। रहमान ने बताया कि ‘अल्लाह रक्खा’ (A.R.) नाम उनकी मां ने चुना था, क्योंकि यह नाम उन्हें एक सपने में आया था।
वहीं, ‘रहमान’ नाम के पीछे एक हिंदू ज्योतिषी का हाथ है। किताब के मुताबिक, धर्म बदलने से पहले उनका परिवार छोटी बहन की शादी के लिए कुंडली दिखाने एक ज्योतिषी के पास गया था। वहां जब रहमान ने नाम बदलने की बात की, तो ज्योतिषी ने उन्हें ‘अब्दुल रहमान’ या ‘अब्दुल रहीम’ नाम सुझाए। उन्हें तुरंत ‘रहमान’ नाम पसंद आ गया और उन्होंने इसे अपना लिया।
सर्वधर्म समभाव वाला बचपन
6 जनवरी 1967 को मद्रास में जन्मे रहमान का बचपन धार्मिक रूप से खुले माहौल में बीता। उन्होंने बताया कि उनकी मां भले ही पक्की हिंदू थीं, लेकिन उनके घर की दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं के साथ-साथ जीसस को गोद में लिए मदर मैरी और मक्का-मदीना की पवित्र तस्वीरें भी लगी होती थीं।
आज ए.आर. रहमान ‘कुन फाया कुन’, ‘जय हो’, ‘रांझणा’ जैसे अनगिनत सुपरहिट गानों के रचयिता हैं। उन्हें ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के लिए दो ऑस्कर अवॉर्ड्स के अलावा, भारत सरकार द्वारा पद्म श्री (2000) और पद्म भूषण (2010) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
