I-PAC रेड मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट में TMC की याचिका खारिज
कोलकाता: कानूनी लड़ाइयों में अक्सर घंटों की लंबी बहस पर एक सटीक दलील भारी पड़ जाती है। कलकत्ता हाईकोर्ट के रूम नंबर वन में बुधवार को ऐसा ही कुछ देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC के लिए यह दिन राहत भरा नहीं रहा, क्योंकि अदालत ने उनकी उस याचिका को निस्तारित कर दिया जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त किए गए कथित डेटा को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी।
कोर्ट रूम में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान TMC की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी पैरवी कर रही थीं, जबकि ED का पक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू रख रहे थे। TMC की दलील थी कि ED ने I-PAC के दफ्तर से उनका बेहद निजी और संवेदनशील ‘राजनीतिक डेटा’ और चुनावी रणनीतियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं, जिसका दुरुपयोग हो सकता है।
सुनवाई के आखिरी क्षणों में जब TMC की वकील बार-बार “माय लॉर्ड, बस दो मिनट… मुझे अपनी बात पूरी करने दीजिए” कहती रहीं, तब ASG एस.वी. राजू ने एक ऐसी दलील दी जिसने केस का आधार ही खत्म कर दिया।
ED का ‘ट्रंप कार्ड’: “हमने कुछ जब्त ही नहीं किया”
ED के वकील ने अदालत को बताया कि एजेंसी ने I-PAC दफ्तर से किसी भी तरह की कोई जब्ती (Seizure) नहीं की है। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा: “हमने वहां से कुछ भी जब्त नहीं किया है। असल में, जो भी रिकॉर्ड, डिवाइस या दस्तावेज वहां मौजूद थे, उन्हें ED ने नहीं बल्कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके साथ आए अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया और अपने साथ ले गईं।”
अदालत का फैसला
जैसे ही ED ने यह बात ऑन-रिकॉर्ड कही कि उनके पास कोई सामान या डेटा है ही नहीं, वैसे ही याचिका का आधार कमजोर पड़ गया। जस्टिस शुभ्रा घोष ने स्पष्ट किया कि जब कोई सामान जब्त ही नहीं हुआ है, तो उसे ‘सुरक्षित रखने’ के आदेश का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अदालत ने इसी दलील के आधार पर TMC की याचिका को डिस्पोज (Dispose of) कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 8 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब ED ने कथित कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में कोलकाता स्थित I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं।
-
TMC का आरोप: ED राजनीतिक द्वेष के कारण पार्टी का चुनावी डेटा चोरी करना चाहती है।
-
ED का आरोप: मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली और एजेंसी को साक्ष्य (Evidence) इकट्ठा करने से रोका।
कलकत्ता हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। ED ने ममता बनर्जी के खिलाफ जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है, जिस पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है।
